गिरिडीहः जैन धर्म के पवित्र तीर्थ स्थल श्री सम्मेद शिखरजी पारसनाथ पर्वत की पवित्रता को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पांच दिन पूर्व जैन और गैर-जैन श्रद्धालुओं में कहासुनी के बाद अब सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ताजा विवाद पवित्र टोंक क्षेत्र में पर्यटकों के जूते-चप्पल पहनकर घूमने का वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ। जिससे देशभर के जैन समाज में गहरा रोष है।
जैन समाज का कहना है कि पवित्र टोंक क्षेत्र में 20 जैन तीर्थकरों के चरण चिन्ह्र विराजित हैं। वहां जूते-चप्पल पहनकर जाना, प्लास्टिक फैलाना धार्मिक आस्था से खिलवाड़ है। वहीं गैर जैन श्रद्धालुओं का कहना है कि वे भी पारसनाथ पर्वत को समान श्रद्धा और आस्था की दृष्टि से देखते हैं। वे वहां सिर्फ दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। किसी की भावना को ठेस पहुंचाना उनका मकसद नहीं है।
विवाद के तीन मुख्य कारण
– पर्वत और मंदिर परिसर में चमड़े के सामान या जूते-चप्पल ले जाना पूरी तरह वर्जित है। लेकिन कुछ लोग इस नियम का उल्लंघन कर रहे हैं।
– मांस, मदिरा, गुटखा, धुम्रपान और प्लास्टिक ले जाना सख्त मना है। लेकिन प्रतिबंध के बावजूद इन नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
-श्रद्धालु इसे मोक्ष स्थली मानते हैं जबकि कई लोग इसे पिकनिक या ट्रैकिंग स्पॉट समझ लेते हैं।
हम सभी प्रकृति पूजक, सौहार्द न बिगाड़ें
शास्वत ट्रस्ट निकारिका के प्रबंधक संजीव जैन ने कहा- पारसनाथ में रहने वाले सभी लोग आपसी भाईचारा और सौहार्द के साथ रहते हैं। किसी के बयान को पूरे जैन समाज की राय नहीं माना जा सकता है। जिस तरह गैर जैन समाज के लोग पारसनाथ में दर्शन-पूजन करते हैं, उसी तरह जैन समाज के लोग भी भगवान शिव की पूजा करते है।







