रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं, ओएमआर शीट में गड़बड़ी के आरोपों और CID की ताबड़तोड़ जांच के बीच आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है।आमतौर पर मीडिया से बात करने से परहेज करनेवाले खियांग्ते ने पहली बार इस्तीफे पर अपनी बात मीडिया के समक्ष रखी। खियांग्ते ने कहा कि जेपीएससी में सीआइडी की जांच शुरू होते हुए उन्हें लगा कि अध्यक्ष की कुर्सी पर रहते हुए उनपर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती। इस कारण उन्होंने सबसे पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने किसी तरह के दबाव में अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से सिरे से इन्कार करते हुए कहा कि दबाव में काम करने का उनका स्टाइल नहीं है।पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि जब किसी परीक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और जांच का दायरा बढ़ रहा है तो केवल एक परीक्षा तक सीमित रहने के बजाय व्यापक स्तर पर जांच होना आवश्यक है। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि कहीं किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है या नहीं।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने और युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए निष्पक्ष जांच ही सबसे बेहतर रास्ता है।
खियांग्ते ने कहा है कि ओएमआर शीट और बिना सिग्नेचर वाले परिणाम के मामले में परीक्षा एजेंसी ही सही जानकारी दे सकती है। मुझे इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है।बिना हस्ताक्षर वाले पीटी रिजल्ट का जो सवाल है।उसके बारे में बता दूं कि हमारा रूल ऑफ प्रोसिजर 2002 में यह अंकित है कि केवल फाइनल मेरिट लिस्ट की तैयारी के समय, जिसमें इंटरव्यू के मार्क्स भी सम्मिलित होंगे, उसी में मेंबर्स के स्क्रूटनी के रोल हैं। उसके पहले के किसी मेंबर के स्क्रूटनी का रोल अंकित नहीं है। इसलिए जो अखबारों में निकला, वह वही है।
कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति यह नहीं चाहेगा कि किसी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम मिले. हम भी यही चाहते हैं कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम ना मिले। हम ये भी देखते हैं कि जिस कंपनी को हम काम दे रहे हैं, उनके पास क्षमता और संसाधन ठीक हैं या नहीं। इसी के आधार पर हम फैसला लेते हैं. जब हमने जांच की थी, तब ऐसी कोई जानकारी हमारे सामने नहीं थी कि कंपनी ब्लैकलिस्टेड है। यदि ऐसी जानकारी पहले होती तो निश्चित रूप से उसे काम नहीं दिया जाता।”
JPSC परीक्षा विवाद: रिजल्ट में गड़बड़ी से लेकर गिरफ्तारियों तक, ये रही पूरी कहानी JPSC Exam Controversy: झारखंड में 14वीं JPSC PT परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद से ही उम्मीदवारों ने गड़बड़ी के आरोप लगाए, इसके बाद जांच शुरू हुई और अब कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
JPSC परीक्षा विवाद: रिजल्ट में गड़बड़ी से लेकर गिरफ्तारियों तक, ये रही पूरी कहानीJPSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला
सोचिए… जिस कुर्सी पर बैठकर लाखों युवाओं के सपनों और भविष्य का फैसला होना था, अगर उसी कुर्सी पर बैठा व्यक्ति कथित अनियमितताओं की फाइलों पर पर्दा डालने लगे, तो उसे क्या कहा जाए? महज लापरवाही, या युवाओं के भरोसे के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात? झारखंड में JPSC को लेकर उठे आरोप अब केवल कथित पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गए हैं। यह मामला उन लाखों अभ्यर्थियों के सपनों, वर्षों की मेहनत और व्यवस्था पर उनके भरोसे से जुड़ा सवाल बन चुका है। अगर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो जाएं, तो यह सिर्फ एक परीक्षा का विवाद नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख पर गंभीर चुनौती है।
JPSC की प्रीलिम्स परीक्षा पर उठे सवाल
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक (PT) परीक्षा अब राज्य के सबसे चर्चित भर्ती विवादों में शामिल हो गई है। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगाए। OMR शीट में कथित गड़बड़ी, परीक्षा संचालन में पारदर्शिता पर सवाल, परीक्षा एजेंसी की भूमिका और JPSC अधिकारियों की कथित मिलीभगत जैसे आरोपों ने मामले को तूल दिया।शिकायतें बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने जांच का जिम्मा CID को सौंपा। इसके बाद हुई छापेमारी, लगातार गिरफ्तारियां और डिजिटल साक्ष्यों की बरामदगी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब यह मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है।
ऐसे शुरू हुआ पूरा विवाद
14वीं JPSC PT परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए।अभ्यर्थियों का आरोप था कि OMR मूल्यांकन और परीक्षा संचालन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रदर्शन किया और सरकार पर दबाव बढ़ता गया।
CID को सौंपी गई जांच
लगातार बढ़ते विवाद और शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी। जांच शुरू होते ही CID ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू की। जांच के दौरान CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय के अलावा परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी TDPL के कार्यालयों में छापेमारी की। इस दौरान कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, सर्वर, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा प्रक्रिया या परिणाम में किस तरह की तकनीकी छेड़छाड़ हुई है।


