लोहरदगा : जिले में भगवान जगन्नाथ की घुरती रथ यात्रा शनिवार को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के बीच संपन्न हुई। नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने-अपने धाम लौटे। जिले के लोहरदगा शहर, भंडरा, सेन्हा, कुडू और कैरो सहित विभिन्न क्षेत्रों में हजारों श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सियां थामकर महाप्रभु को उनके मंदिर तक पहुंचाया। पूरे दिन जय जगन्नाथ, हरि बोल, शंखनाद और घंटियों की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

लोहरदगा शहर में तीन स्थानों से निकली घुरती रथ यात्रा
लोहरदगा शहर में घुरती रथ यात्रा का विशेष आकर्षण देखने को मिला। महावीर चौक ईस्ट गोला रोड स्थित मौसीबाड़ी से भगवान जगन्नाथ का रथ गुदरी बाजार स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर, तिवारी दुरा स्थित श्री जगन्नाथ महाप्रभु मंदिर तथा तेतरतर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर की ओर रवाना हुआ। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया और रथ को स्पर्श कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। सुबह से ही मौसीबाड़ी परिसर में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग गई थीं। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के श्रद्धालु भगवान के दर्शन और महाप्रसाद ग्रहण करने पहुंचे। विशेष पूजा-अर्चना और भोग अर्पित करने के बाद जैसे ही रथ आगे बढ़ा, श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ रस्सियां थामकर भगवान को उनके धाम तक ले जाने में जुट गए।रथ यात्रा के दौरान मौसम ने कई बार करवट ली, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकी। भक्त नंगे पांव रथ खींचते नजर आए। महावीर चौक, अपर बाजार और गुदरी बाजार सहित पूरे यात्रा मार्ग पर भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने और उनके दर्शन करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

भंडरा में ऐतिहासिक मेले का भव्य समापन
भंडरा प्रखंड में आयोजित नौ दिवसीय ऐतिहासिक रथ यात्रा मेला घुरती रथ यात्रा के साथ संपन्न हो गया। अखिलेश्वर धाम स्थित मौसीबाड़ी में सुबह से दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रही। दोपहर में भगवान के रथ प्रस्थान से ठीक पहले हुई झमाझम बारिश के बाद मौसम साफ हो गया, जिसे श्रद्धालुओं ने शुभ संकेत माना। सैकड़ों भक्तों ने भगवान के विशाल रथ की रस्सियां खींचीं और उन्हें मुख्य ठाकुरबाड़ी तक पहुंचाया। मंदिर पहुंचने पर विशेष महाआरती, पूजा-अर्चना और महाप्रसाद वितरण हुआ। श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। मेले में ग्रामीण संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। झूले, खिलौने, चाट, फुचका, पारंपरिक मिठाइयों और घरेलू उपयोग की दुकानों पर दिनभर खरीदारों की भीड़ रही। इससे स्थानीय व्यापारियों को भी अच्छा कारोबार मिला।

सेन्हा और कोराम्बे में गूंजा जय जगन्नाथ
सेन्हा प्रखंड के सेन्हा और कोराम्बे में भी घुरती रथ यात्रा पूरे धार्मिक उत्साह के साथ निकाली गई। आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद विग्रहों को रथ पर विराजमान कर ठाकुरबाड़ी लाया गया। अखिलेश्वर धाम स्थित मौसीबाड़ी से धाम पहुंचने पर पुरोहित अवनीश पाठक सहित अन्य आचार्यों ने विशेष पूजा कर भगवान के विग्रहों को मंदिर में पुनः स्थापित किया। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सियां खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कैरो के हनहट गांव में उमड़ी श्रद्धा
कैरो प्रखंड के हनहट गांव में भी घुरती रथ यात्रा श्रद्धापूर्वक निकाली गई। पुरोहित धनंजय पांडे ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कराई। इसके बाद भगवान जगन्नाथ को रथ पर विराजमान कर मौसीबाड़ी से मंदिर तक लाया गया। श्रद्धालुओं ने रथ खींचने के साथ पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली की कामना की। मेले में मिठाई, खिलौने और अन्य ग्रामीण बाजारों में भी अच्छी चहल-पहल रही।

कुडू में जयघोष के साथ लौटी भगवान की सवारी
कुडू प्रखंड के बस स्टैंड स्थित हनुमान मंदिर मौसीबाड़ी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की घुरती रथ यात्रा निकाली गई। इंदिरा गांधी चौक स्थित शिव मंदिर तक निकली यात्रा में कुडू सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जय जगन्नाथ के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने रथ खींचा और भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
जिलेभर में आयोजित घुरती रथ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। प्रमुख रथ यात्रा मार्गों पर दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती की गई थी। लोहरदगा शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। कई संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी और अन्य निगरानी व्यवस्था भी सक्रिय रही। पूरे जिले में सभी धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए।


आस्था और परंपरा का जीवंत उत्सव
घुरती रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग की भागीदारी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। नौ दिनों के मौसीबाड़ी प्रवास के बाद महाप्रभु की धाम वापसी के साथ जिलेभर में रथ यात्रा महोत्सव का समापन हुआ, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और उल्लास की अमिट छाप छोड़ गया।


