पटनाः पेपर लीक को लेकर हो रहा विरोध प्रदर्शन एक ओर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी है तो दूसरी ओर पटना में भी इसको लेकर छात्रों की भीड़ सड़क पर उतर आई है। 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों की पुलिस पिटाई के बाद अब इसका असर सड़क पर देखने को मिल रहा है। एक ओर दिल्ली में छात्रों की पिटाई हुई तो दूसरी ओर छात्रों के आक्रोश का शिकार पत्रकार हो रहे है। दिल्ली में टीवी चैनलों के कई पत्रकारों को गोदी मीडिया के नाम पर भीड़ ने अपना शिकार बनाया है। मंगलवार को टाइम्स नाउ के पत्रकार को दिल्ली में उग्र भीड़ ने गोदी मीडिया कहते हुए बुरी तरह पीटा। यहीं नहीं उसके चश्मे को तोड़ दिया, कपड़े फाड़ दियो और घड़ी भी छीन लिया।
पटना में ABP न्यूज संवाददाता आर्यन पर हमला
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— Live Dainik (@Live_Dainik) July 22, 2026
दूसरी ओर बुधवार को बिहार की राजधानी पटना में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पटना में बुधवार का दिन बहुत ही अफरा-तफरी का रहा। एक ओर कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम का घेराव करने जा रहे बीजेपी के कार्यकर्ताओं का कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ हिंसक झड़प हुई। मारपीट- पत्थरबाजी के बीच जमकर लाठी डंडे चले। इसमें कई कार्यकर्ताओं को चोट भी आई। वहीं नीट पेपर लीक को लेकर सड़क पर उतरी छात्रों की उग्र भीड़ का शिकार पटना में एबीपी न्यूज के पत्रकार आर्यन आनंद शर्मा हुए। छात्रों की भीड़ ने न्यूज कवरेज कर रहे आर्यन आनंद को गोदी मीडिया कहते हुए जमकर पीटा। पहले उनके सिर पर रॉड से वार किया फिर लात-घूसे से उनकी जमकर पिटाई कर दी।
आर्यन आनंद अपनी सहिष्णुता दिखाते हुए भीड़ के बीच से किसी तरह बच के बाहर निकले, इस दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने उन्हें भीड़ से बाहर निकाला। छात्रों की भीड़ के शिकार बने आर्यन आनंद ने अपनी पिटाई के बाद भी बड़प्पन दिखाते हुए कहा कि ये स्टूडेंट थे, इन पर मैं कोई कार्रवाई नहीं करूंगा। बदकिस्मती रही कि छात्रों के आक्रोश का शिकार होना पड़ा।
दरअसल, मीडिया का एक वर्ग जिस तरह से पेपर लीक को लेकर छात्रों के आंदोलन की रिपोर्टिंग कर रही है उसका शिकार फिल्ड में घूम रहे पत्रकार हो रहे है। न्यूज चैनल के स्टूडियों में बैठकर प्रोपेगेंडा चलाने वालों के खिलाफ गुस्से का शिकार फिल्ड में घूम रहे पत्रकार हो रहे है। दिल्ली से लेकर पटना तक गोदी मीडिया के नाम पर पत्रकारों की पिटाई हो रही है। रिपोर्टरों की इस पिटाई से पत्रकारों में आक्रोश है। पत्रकारों का कहना है कि वो आंदोलन में किसी भी तरह की हिंसा का विरोध करते है चाहे वो छात्रों की पिटाई हो या फिर गोदी मीडिया के नाम पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हुआ हमला ही क्यों न हो।


