गिरिडीहः बैंक ऑफ इंडिया की इसरी बाजार शाखा में 1 करोड़ 92 लाख 37 हजार 171 रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। इस मामले में बैंक के पूर्व सीनियर मैनेजर रांची के हेहल निवासी प्रदीप कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। वर्तमान मैनेजर विनोद कुमार ने निमियाघाट थाने में प्रदीप कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, विश्ववासघात और बैंक फंड के गबन के आरोप में केस दर्ज कराया है।
इस घोटाले का भंडाफोड़ उस समय हुआ, जब बैंक के अर्ली वॉर्निंग सिग्नल सिस्टम ने चार अप्रैल और 10 अप्रैल को अलर्ट जारी किया। जांच में टर्म डिपोजिट के खिलाफ लिमिट बनाने में कई विसंगतियां मिली। इसके बाद विस्तृत जांच शुरू हुई और कड़ियां जुड़ती चली गई। बैंक के बोकारो आंचलिक कार्यालय के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक अगरदीप प्रसाद केशरी द्वारा की गई आंतरिक जांच में यह सच्चाई सामने आई। पूछताछ में उसने जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि लोन की रकम को शेयर बाजार में निवेश कर दिया। वहां भारी नुकसान हुआ।
सूबत मिटाने के लिए रिकार्ड से ही गायब कर दी फाइलें
वर्तमान मैनेजर विनोद कुमार के अनुसार, जब बैंक रिकार्ड का मिलान किया गया तो पता चला कि आरोपी ने साजिश के तहत इस हेराफेरी को अंजाम दिया। इन फर्जी ओवरड्राफ्ट खाते से जुड़े मूल दस्तावेज, लोन एप्लीकेशन फॉर्म और ग्राहकों की मूल सावधि जाम रसीदें बैक के रिकार्ड रूम से गायब कर दी।
जानिए….. कैसे दिया घोटाले को अंजाम
-ग्राहकों की 17 एफडी को चुपके से ब्लॉक कर दिया
जांच रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी मैनेजर ने सबसे पहले बैंक के उन 15 ग्राहकों को निशाना बनाया, जिन्होंने बैंके फिक्स्ड डिपॉजिट करा रखा था। उसने ग्राहकों की जानकारी और सहमति के बिना उसकी 17 एफडी को अवैध रूप से ब्लॉक कर दिया। बैंकिंग सिस्टम में एफडी ब्लॉक करने का मतलब होता है कि अब उस राशि पर लोन लिया जा सकता है या उसे गारंटी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
– मां के नाम पर दो ओवरड्राफ्ट खाता खोला
ग्राहकों की एफडी को ब्लॉक करने के बाद आरोपी ने अपनी मां मंजू देवी के नाम पर दो ओवरड्राफ्ट खाता खोला। ओवरड्राफ्ट एक तरह का लोन खाता होता है, जिसमें किसी सिक्योरिटी के बदले एक निश्चित रकम निकालने की लिमिट मिलती है।
-एफडी को लिंक कर करोड़ों रुपए का लोन लिया
आरोपी ने मां के उन दोनों ओवरड्राफ्ट खाते को ग्राहकों की उन 17 ब्लॉक की गई एफडी से लिंक कर दिया। फिस उसे सिक्योरिटी के रूप में दिखाकर 1.92 करोड़ रुपए की लोन लिमिट तैयार कर ली। फिर धीरे-धीरे पूरी रकम निकालकर इस गबन को अंजाम दिया।


