रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए बिना पूछा है कि आदिवासी कब से वनवासी हो गए हैं । दरअसल अमित शाह ने दिल्ली में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागत में आदिवासियों को बारबार वनवासी कहा । आदिवासियों को वनवासी कहे जाने के खिलाफ रांची में आदिवासी संगठनों ने प्रदर्शन भी किया है ।
आदिवासी कब से हो गए वनवासी ?
हेमंत सोेरेन ने कई विभागों की समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पूछा कि आदिवासी कब से हो गए वनवासी ? हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासियों को “वनवासी” कहे जाने का मुद्दा नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से कुछ लोग आदिवासी समुदाय की पहचान बदलने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से वह इस बात को उठाते आ रहे हैं कि कुछ व्यवस्थाएं आदिवासी समाज को उसकी मूल पहचान से स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और अलग-अलग नामों व नई शब्दावली के जरिए उन्हें भ्रमित करने का प्रयास किया जाता रहा है। हालांकि, झारखंड का आदिवासी समुदाय हमेशा अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष करता आया है और अपनी समझ व जागरूकता के कारण ऐसे प्रयासों को पहचानता रहा है।
अमित शाह ने कहा था वनवासी
गौरतलब है कि बीजेपी हमेशा से आदिवासियों को वनवासी कह कर पुकारती रहती है । दिल्ली में आयोजित जनजातीय समागम में भी अमित शाह ने कई बार वनवासी शब्द का प्रयोग किया । माना जा रहा है कि बीजेपी झारखंड में सत्ता वापसी को लेकर धर्मांतरण और आदिवासियों को हिन्दू या सनातन का अंग बताकर नया नरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है ।
UCC पर अमित शाह ने क्या कहा ?
दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा था कि ” केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अब एक षड्यंत्र शुरू हुआ है कि UCC जनजातियों को अपनी संस्कृति, परंपरा, परंपरा से जीने के अधिकार से वंचित कर देगा। मोदी सरकार के गृह मंत्री के नाते मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि UCC की कोई पाबंदी वनवासी समाज पर नहीं लगेगी और इससे किसी वनवासी के किसी भी अधिकार का अतिक्रमण नहीं होगा। हमने गुजरात और उत्तराखंड में UCC लागू किया है और विशेष प्रावधान कर UCC से सारी जनजातियों को बाहर रखने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है। श्री शाह ने कहा कि मैं भेद पैदा करने वालों को बताना चाहता हूं कि UCC से किसी भी जनजाति की परंपरा से कोई खिलवाड़ नहीं होगा। “


