रांचीः झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री दोपहिया वाहनों के लिए पेट्रोल क्रय अनुदान योजना’ को फरवरी 2026 से संचालित नहीं रखने का निर्णय लिया गया है।यह जानकारी खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग से मांगे गए आरटीआइ से सामने आई है। इस संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता सुनील महतो ने विभाग से जानकारी मांगी थी।
उनको मिले दस्तावेज में विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना के लिए कुल दस करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था।इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए पांच करोड़, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए चार करोड़ और अनुसूचित जाति के लिए एक करोड़ रुपये शामिल थे।
विभागीय पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि वर्तमान में लाभुकों द्वारा इस योजना में अभिरुचि नहीं ली जा रही है एवं योजना पूर्णरूपेण क्रियाशील नहीं है।इसी कारण यह योजना फरवरी 2026 से संचालित नहीं रहेगी। पिछले और चालू वित्तीय वर्ष में प्राप्त आवेदनों के आधार पर ही लाभ देने और तकनीकी कर्मियों के मानदेय भुगतान की स्वीकृति दी गई थी।विभाग ने सभी जिला आपूर्ति पदाधिकारियों एवं उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि योजना के तहत बाहरी स्रोत से रखे गए तकनीकी कर्मियों को नोटिस जारी कर कार्यमुक्त कर दिया जाए।
प्रशासनिक व्यय और प्रचार पर खर्च
दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच प्रचार-प्रसार, सेमिनार एवं प्रशिक्षण जैसे मदों में भी सरकार ने पर्याप्त राशि आवंटित की। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस मद में 12 करोड़ रुपये संशोधित (बजट अनुमान) था, जिसमें से 10.25 करोड़ आवंटित किए गए और 4.90 करोड़ रुपये व्यय किए गए। जिस योजना के प्रचार पर यह राशि खर्च की गई, वह योजना स्वयं लाभुकों की कम रुचि के कारण ठप हो गई।
क्या थी यह योजना
झारखंड सरकार ने फरवरी 2026 से मुख्यमंत्री दोपहिया वाहन पेट्रोल क्रय अनुदान योजना को बंद करने का निर्णय लिया है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी सामने आई है।26 जनवरी 2022 को शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य राज्य के राशन कार्ड धारक दोपहिया वाहन मालिकों को पेट्रोल पर राहत देना था।इसके तहत लाभार्थियों को प्रति माह अधिकतम 10 लीटर पेट्रोल पर 25 रुपये प्रति लीटर की दर से 250 रुपये की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जाती थी।योजना के बंद होने का मुख्य कारण लाभार्थियों की कम रुचि और तकनीकी जटिलताएं हैं। आवेदन के लिए राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण का एक ही नाम पर होना अनिवार्य था, जिससे कई लोग बाहर हो गए।इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में जहां मूल बजट 10 करोड़ रुपये था, वहीं इसके प्रचार-प्रसार पर 12 करोड़ रुपये का संशोधित बजट रखा गया था।तकनीकी रूप से ठप होने के बाद अब इससे जुड़े संविदा कर्मियों को भी सेवामुक्त किया जा रहा है।


