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एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा कर सकते है सरेंडर! नक्सली प्रवक्ता अश्विनी भी हथियार डालने की तैयारी में जुटा

एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा कर सकते है सरेंडर! नक्सली प्रवक्ता अश्विनी भी हथियार डालने की तैयारी में जुटा

डेस्कःएक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और नक्सली प्रवक्ता अश्विन सहित आने वाले दिनों में कर सकते हैं सरेंडर। झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सलियों के बीच अंदरूनी टूट और बढ़ते दबाव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सुरक्षा बलों के बड़े अभियान और लगातार घेराबंदी के कारण नक्सली संगठन में बेचैनी बढ़ गई है।मिसिर बेसरा को वर्तमान में झारखंड का सबसे बड़ा नक्सली माना जाता है और उसके सरेंडर करने से राज्य में एक तरह से नक्सवाद का सफाया हो जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों ने बड़े स्तर पर ऑपरेशन चला रखा है। जंगल के कई इलाकों में लगातार सर्च अभियान और मुठभेड़ की खबरें मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों की कड़ी घेराबंदी के कारण नक्सलियों के लिए जंगल से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। मिसिर बेसरा को पकड़ने के लिए लगभग 3,000 सीआरपीएफ जवान और कोबरा कमांडो तैनात हैं।
जानकारी के मुताबिक, एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा अभी भी सारंडा क्षेत्र में छिपा हुआ है। लेकिन अभियान के दबाव से उसके दस्ते में खलबली मची हुई है। खबर यह भी है कि उसके साथ रहने वाले कई नक्सली या तो भाग चुके हैं या सरेंडर करने की तैयारी में हैं।
सूत्रों का दावा है कि मिसिर बेसरा का बॉडीगार्ड भी उसका साथ छोड़ चुका है। वहीं नक्सली प्रवक्ता अश्विन द्वारा दस्ते के लड़ाकों को यह समझाने की बात सामने आ रही है कि अब सुरक्षाबलों के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाना संभव नहीं है।इन घटनाओं के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सुरक्षा बलों के ऑपरेशन के कारण मिसिर बेसरा के पास राशन और हथियारों की कमी हो गई है। हाल ही में, उसके दस्ते के 15 नक्सलियों ने सरेंडर किया था, जिससे उस पर दबाव और बढ़ गया है।सीआरपीएफ (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिसिर बेसरा को सरेंडर करने या कड़ी कार्रवाई (एनकाउंटर) का सामना करने का अल्टीमेटम दिया है।
मिसिर बेसरा प्रतिबंधित भाकपा माओवादी के सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो का सदस्य है। 2004 में 32 जवानों की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया था और वह 2007 में रांची से गिरफ्तार होने के बाद 2009 में लखीसराय कोर्ट पर हुए हमले के दौरान भाग गया था।

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