कल्पना सोरेन के हेलीकॉप्टर को नहीं मिली अनुमति, असम में फोन पर किया सभा को संबोधित, हेमंत ने कहा-जनसमर्थन बदलाव की आहट

कल्पना सोरेन के हेलीकॉप्टर को नहीं मिली अनुमति, असम में फोन पर किया सभा को संबोधित, हेमंत ने कहा-जनसमर्थन बदलाव की आहट

रांचीः असम विधानसभा चुनावद में जेएमएम प्रत्याशी के समर्थन में चुनावी सभा को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन खूब पसीना बहा रहे है। रविवार को कल्पना सोरेन को हेलीकॉप्टर से सभा को संबोधित करने की अनुमति प्रशासन ने नहीं दी तो उन्होंने मोबाइल फोन के माध्यम से जनता तक अपने संदेश पहुंचाये। असम के खुमताई, नहरकटिया और मार्गेरीटा विधानसभा क्षेत्र में उन्हें प्रचार करना था।

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कल्पना सोरेन ने मोबाइल के माध्यम से सभा को संबोधित किया और अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी भावनाओं को रखते हुए लिखा कि आज खुमताई – नहरकटिया एवं मार्गेरीटा विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर JMM – JBP समर्थकों और वहां की संघर्षशील जनता को संबोधित करने का कार्यक्रम था।
लेकिन दुर्भाग्यवश, प्रशासन द्वारा हेलीपैड की स्वीकृति नहीं दिए जाने के कारण मैं वहां प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहुंच सकी।
हालांकि, असम के दूसरे छोर पर स्थित मार्गेरीटा विधानसभा क्षेत्र के कार्यक्रम में सड़क मार्ग से जाते हुए, मैंने फोन के माध्यम से खुमताई, नहरकटिया की महान, आंदोलनरत जनता मालिक को संबोधित किया और अपना संदेश पहुंचाया।
साथियों, असम में हम जिस लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं, उसमें इस तरह की रुकावटों का अंदेशा हमें पहले से था।
हमें मालूम था कि सत्ता में बैठे लोग हमारी आवाज़ को रोकने, हमारे कदमों को थामने और जनता तक हमारे संदेश को पहुंचने से रोकने की हर संभव कोशिश करेंगे।
लेकिन मैं सत्ता में बैठे लोगों से कहना चाहती हूँ —
आप रास्ता रोक सकते हैं, लेकिन जनआक्रोश नहीं रोक सकते।
आप हेलीकॉप्टर रोक सकते हैं, लेकिन जनता के इरादे नहीं रोक सकते। आप मंच छीन सकते हैं, लेकिन आंदोलन की आवाज़ नहीं दबा सकते।
आज उन्होंने यह सोचकर रुकावट पैदा की कि शायद हमारी आवाज़ खुमताई तक नहीं पहुंचेगी। लेकिन वे यह भूल गए कि अब असम की जनता जाग चुकी है, समझ चुकी है और जवाब देने का मन बना चुकी है।

खुमताई – नहरकटिया की जनता, चाय बागानों की मेहनतकश जनता, आदिवासी समाज, अल्पसंख्यक समाज, नौजवान, माताएं-बहनें — सब इस अन्याय का जवाब देंगे।
और यह जवाब भाषण से नहीं,
9 तारीख को वोट की चोट से दिया जाएगा।
खुमताई- नहरकटिया – मार्गरिटा सहित असम की हर उस सीट पर, जहां जनता को दबाने की कोशिश की गई है, वहां-वहां लोग तीर-धनु पर भारी संख्या में मतदान कर इस अहंकारी सत्ता को जवाब देंगे।
यह चुनाव केवल सरकार बदलने का चुनाव नहीं है,
यह चुनाव सम्मान, पहचान, अधिकार और हिस्सेदारी की लड़ाई है।
तो आइए,
हर घर से आवाज़ उठे —
तीर-धनु हमारा अभिमान है,
तीर-धनु हमारी पहचान है,
तीर-धनु हमारे अधिकार की लड़ाई का निशान है।
9 तारीख को भारी संख्या में मतदान करें,
तीर-धनु पर बटन दबाएं,
और जनता की ताकत का अहसास कराएं।
तीर-धनु जिंदाबाद!
झारखंड मुक्ति मोर्चा जिंदाबाद!
जनता मालिक जिंदाबाद!

 

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वहीं दूसरी ओर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम में अपनी चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि असम की धरती पर उमड़ रहा जनसमर्थन बदलाव की स्पष्ट आहट है।चाय बागानों से जुड़े शोषित, वंचित और आदिवासी समाज के साथ वर्षों से हो रहे अन्याय को अब खत्म करना होगा। मेरे इन भाइयों-बहनों का सम्मान, अधिकार और उचित मजदूरी सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।यह लड़ाई सिर्फ चुनाव की नहीं, बल्कि न्याय, पहचान और हक की है, और तीर-धनुष की ताकत के साथ हम इसे लेकर रहेंगे।सुना है विरोधियों द्वारा लोगों को यहां डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।मैं बता देना चाहता हूं कि अब यह सब चलने वाला नहीं है। क्योंकि अब शोषित, वंचित और आदिवासी समाज एकजुट हो चुका है और वह लड़कर अपना अधिकार लेकर रहेगा।असम का एकजुट शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित और पिछड़ा समाज इस बार अपने हक-अधिकार के लिए वोट करेगा।

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