- Advertisement -
krishi vyapar mela 2026

नवजात की मौत के बाद कागज के कार्टन को बना दिया ताबूत, डेडबॉडी को पिता खुद उठाकर ले गए

नवजात की मौत के बाद कागज के कार्टन को बना दिया ताबूत, डेडबॉडी को पिता खुद उठाकर ले गए

पश्चिमी सिंहभूमः चाईबासा अनुमंडल अस्पताल से एक मानवता को शर्मसार और दिल को दुःखी करने वाली घटना सामने आई है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता देखिये कि नवजात की मौत के बाद उसके शव को कागज के कार्टन में परिजनों को दिया गया। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और असंवेदनशीलता की वजह से एक गरीब पिता को अपने बच्चे के शव को कार्डबोर्ड के डब्बे में रखकर घर ले जाना पड़ा। ये घटना सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश और पीड़ा है।

प्रेग्नेंट नाबालिग प्रेमिका को अगवा कर सर्जरी से कराई डिलिवरी, नवजात को बेचने की साजिश, अस्पताल संचालक समेत तीन गिरफ्तार
जानकारी के अनुसार, कराइकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव के रहने वाले रामकृष्ण हेम्ब्रम ने तीन दिन पूर्व अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था। शनिवार को रीता तिरिया ने एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन जन्म के कुछ ही देर बाद ही नवजात शिशु की मौत हो गई।परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण ही बच्चे की जान नहीं बच सकी।परिजनों का कहना है कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिवार को कोई सहयोग या सहानुभूति देने के बजाय शव को तुरंत अस्पताल से हटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब पिता ने शव को घर तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस की मांग की, तो अस्पताल की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई।

See also  लोहरदगा में शिक्षा नहीं, भ्रष्टाचार की हो रही पढ़ाई! पीएमश्री योजना में करोड़ों की कैसे हुई खुली लूट? पढ़िए...

रांची एयरपोर्ट के पास टीटोस रेस्टोरेंट में अपराधियों ने की ताबड़तोड़ फायरिंग, एक की मौत प्रिंस खान के नाम पर दी गई थी धमकी
जिसने भी देखा, आंखें हो गईं नम
गरीबी और बेबसी के बीच पिता रामकृष्ण हेम्ब्रम ने अंततः एक खाली कार्डबोर्ड के डिब्बे में अपने नवजात के शव को रखा और उसी हालत में उसे लेकर घर के लिए रवाना हो गए। अपने ही बच्चे के शव को डिब्बे में लेकर जाते पिता का यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के गांवों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में ग्रामीण और गरीब मरीजों के साथ अक्सर उपेक्षा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है।
यदि अस्पताल प्रशासन चाहता तो मानवता के नाते एम्बुलेंस से शव को घर तक पहुंचाया जा सकता था। ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने व पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई है। ताकि भविष्य में किसी गरीब परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।

See also  धनबाद में CBI छापेमारी के दौरान दीवार से बैग फेंकने का वीडियो वायरल, पटना-धनबाद के प्रिंसिपल इनकम टैक्स कमिश्नर रिश्वत लेते हुए थे गिरफ्तार

आशुतोष महाराज पर चलती ट्रेन जानलेवा हमला, बाथरूम में बंद होकर बचाई जान
पीड़ित परिवार ने शव ले जाने की परेशानी की कोई जानकारी नहीं दी: डॉ.अंशुमन
इस मामले में चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अंशुमन शर्मा ने कहा है कि पीड़ित परिवार द्वारा उनसे संपर्क कर शव ले जाने के लिए किसी तरह की सहायता की मांग नहीं की गई थी।अगर मांग की जाती तो व्यवस्था उपलब्ध थी। ममता वाहन में बच्चे के शव को ले जाने के लिए उन्हें सुविधा दी जा सकती थी।लेकिन दुर्भाग्य से पीड़ित परिवार अपनी समस्या से उस वक्त अस्पताल प्रबंधन को सूचित नहीं कर पाई।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now