शोभा ओहटकर बनीं बिहार कर्मचारी चयन आयोग की नई अध्यक्ष, 1990 बैच की IPS अधिकारी 30 जून को हुई थी रिटायर्ड

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August 2, 2026

शोभा ओहटकर बनीं बिहार कर्मचारी चयन आयोग की नई अध्यक्ष, 1990 बैच की IPS अधिकारी रही 30 जून को हुई थी रिटायर्ड

पटनाः बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 1990 बैच की सेवानिवृत्त आईपीएस IPS अधिकारी शोभा ओहटकर को बिहार कर्मचारी चयन आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस संबंध में विभाग द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नियुक्ति बिहार कर्मचारी चयन आयोग अधिनियम, 2002 (समय-समय पर यथा संशोधित) की धारा-3 के तहत की गई है।शोभा ओहटकर 30 जून 2026 को भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत हुई थी।
अरविंद कुमार चौधरी को किया गया प्रभार मुक्त
शोभा ओहटकर अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से अगले आदेश तक आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालेंगी। इस नई नियुक्ति के साथ ही अरविंद कुमार चौधरी (IAS, 1995 बैच), अपर मुख्य सचिव (मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना) को बीएसएससी BSSC अध्यक्ष के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
रिटायर्ड IPS शोभा ओहटकर ने 1992 में पटना सिटी एएसपी के रूप में अपनी पहली पोस्टिंग संभाली थी। इसके बाद वे पटना, दरभंगा, हजारीबाग, छपरा, वैशाली और देवघर समेत कई जिलों में एसपी रहीं।
उनके नाम से ही अपराधियों के रोंगटे खड़े हो जाते थे रोंगटे
कहा जाता है कि उस समय बिहार में अपराध चरम पर था—हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और रंगदारी जैसी घटनाएं आम थीं। ऐसे माहौल में जिस जिले में उनकी पोस्टिंग होती थी, वहां अपराध पर काफी हद तक नियंत्रण देखने को मिलता था और लोगों का भरोसा प्रशासन पर बढ़ता था।
पुणे में हुआ था आईपीएस शोभा ओहटकर का जन्म
शोभा ओहटकर का जन्म पुणे में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद से पॉलिटिक्स में एमए करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा पास की। उनके पिता बलराम अहोटकर हैदराबाद में एक्साइज कमिश्नर रहे हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को हमेशा देती रही हैं। उनके एक बेटा और एक बेटी हैं और वे पहले ही वैवाहिक जीवन में तलाक ले चुकी हैं। आईपीएस शोभा ओहटकर 1992 से 2000 के बीच बिहार के छह जिलों में एसपी रहीं और अपने सख्त प्रशासनिक अंदाज के लिए काफी चर्चित रहीं। उस समय बिहार और झारखंड एक ही राज्य था। 2000 में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महाराष्ट्र चली गईं और 2020 में बिहार लौटकर डीजी पद पर पहुंचीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई जिलों में अपराध और माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की और अपनी पहचान बनाई और लंबे समय तक चर्चा में रहीं।
6 जिलों की SP रह चुकी हैं शोभा
शोभा ओहटकर पटना, दरभंगा, हजारीबाग, छपरा, वैशाली और देवघर सहित छह जिलों में एसपी रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल में हजारीबाग और देवघर की पोस्टिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रही हैं। हजारीबाग में एसपी रहते हुए उन्होंने कोयला माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान करोड़ों रुपए का कोयला जब्त किया गया और 40 से अधिक कोयला तस्करों को जेल भेजा गया, जिसमें कई बड़े माफिया भी शामिल थे। इस कार्रवाई की उस समय बहुत चर्चा हुई थी। हालांकि “गिनीज बुक रिकॉर्ड” वाला दावा व्यापक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता, इसलिए इसे खबर में सावधानी से ही इस्तेमाल किया जाता है।
बीच सड़क पर पिटाई, महिला अपराध पर कड़ा एक्शन
शोभा ओहटकर को उनके सख्त रवैये और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए “हंटर वाली मैडम” कहा जाने लगा। देवघर में पोस्टिंग के दौरान महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की घटनाओं पर उन्होंने सख्त एक्शन लिया और अपराधियों पर कड़ा शिकंजा कसा। बताया जाता है कि बैजनाथ धाम मंदिर क्षेत्र में भी महिलाओं से अभद्र व्यवहार की घटनाओं के बाद उन्होंने त्वरित कार्रवाई की, जिससे अपराधियों में डर का माहौल बना। 1998 में दरभंगा में एसपी रहते हुए उन्होंने अपहरण जैसे गंभीर मामलों पर प्रभावी जांच की और कार्रवाई की, जिससे कई घटनाओं पर नियंत्रण पाया गया। इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन वे अपने काम में डटी रहीं।
वैशाली में कई बड़े अपराधी गैंग का किया था खात्मा
वैशाली जिले में एसपी रहते हुए शोभा ओहटकर ने कई अपराधी गैंगों पर सख्त कार्रवाई की और राघोपुर के दियारा क्षेत्र में सक्रिय कई गैंगों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया। उस समय क्षेत्र में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए की गई कार्रवाई काफी चर्चा में रही। वे अक्सर कहती थीं कि एक आईपीएस अधिकारी को फील्ड, सीआईडी और स्पेशल ब्रांच—हर स्तर का अनुभव होना चाहिए ताकि कानून-व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सके। वर्ष 2023 में उनका नाम आईजी विकास वैभव के साथ विवाद को लेकर सुर्खियों में आया था। आरोपों और जवाबी बयानबाजी के बीच मामला प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में रहा। हालांकि शोभा ओहटकर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे अनुशासनहीनता और कार्य में बाधा का मामला बताया था।इन विवादों से इतर, उन्हें बिहार में फायर सर्विस और होमगार्ड के आधुनिकीकरण और सुधार में उनके योगदान के लिए भी जाना जाता है।

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