निकाय चुनाव के बाद BJP और JMM की बनने जा रही है सरकार, पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी का दावा

निकाय चुनाव के बाद BJP और JMM की बनने जा रही है सरकार, पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी का दावा

रांचीः झारखंड में हो रहे निकाय चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। यह चुनाव दलगत नहीं होने के बावजूद सभी दलों ने अपने-अपने खिलाड़ी चुन रखे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद शहरों की सत्ता में अपने प्रतिनिधि बिठाने के लिए हर दल ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने कहा है कि जेएमएम बीजेपी के साथ मर्ज करने जा रही है। 15-20 दिनों के भीतर यह दिखाई देगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हरी झंडी मिल चुकी है।

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दरअसल, केएन त्रिपाठी ने राज्य की सत्ता में बड़ा फेरबदल होने का दावा किया है। उनका कहना है कि निकाय चुनाव के बाद प्रदेश में बीजेपी और जेएमएम के बीच गठबंधन हो जाएगा और प्रदेश में एनडीए की सरकार बनेगी।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि जेएमएम और बीजेपी के बीच डील हो चुकी है और इसका प्रमाण निकाय चुनाव के बाद दिखाई देगा।उनका दावा है कि प्रदेश में अब जेएमएम पूरी तरह से बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रही है। 15-20 दिनों में इसका ऐलान भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी इसे हरी झंडी मिल गई है। दोनों दलों के बीच डील फाइनल हो चुकी है और निकाय चुनाव के बाद यह सरकार बदलने जा रही है।

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इस पर बीजेपी का क्या कहना है?
कांग्रेस नेता के दावों का बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने खंडन किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरी तरह से आगामी चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है। उन्होंने वर्तमान सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर भी कोई ठोस उपलब्धि नहीं होने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता ने कहा कि झारखंड के लोगों को केवल सपने दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।उन्होंने कहा कि जब सरकार की प्राथमिकता निजी लाभ होगी, तो स्वाभाविक है कि सरकारी खजाना खाली रहेगा और विकास कार्य प्रभावित होंगे।
कांग्रेस नेता के दावे की हकीकत?
बता दें कि झारखंड में अभी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व जेएमएम, कांग्रेस, राजद और वामदलों की सरकार चल रही है।सत्ता में शामिल सहयोगी दलों से मतभेद की शुरुआत बिहार चुनाव के दौरान से हुई थी। जेएमएम उस वक्त महागठबंधन के साथ मिलकर बिहार चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन राजद ने उसे एक भी सीट देना जरूरी नहीं समझा था। इसके बाद से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मंच पर कांग्रेस और राजद के विधायकों को जगह नहीं दी जा रही है।

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