नालंदाः राजगीर के दिगंबर जैन धर्मशाला के अहाता नंबर दो परिसर स्थित कमरा नंबर छह-एबी में बेंगलुरु निवासी एक परिवार के चार सदस्यों की मौत के मामले में नालंदा पुलिस की एसआईटी को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। छह फरवरी को उस कमरे से जी आर नागा प्रसाद (50 वर्ष), उसकी मां जीआर सुमंगला (75 वर्ष), बहन श्रुथा जीआर (43 वर्ष) एवं शिल्पा जीआर (48 वर्ष) का शव फंदे से लटका मिला था। पुलिस दरवाजा तोड़ अंदर घुसी तो शव लटके मिले थे।
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निजी सुरक्षा गार्ड का काम करता था नागा
नागा कर्नाटक में निजी सुरक्षा गार्ड का काम करता था। परिवार के साथ भ्रमण करता हुआ नेपाल से 31 जनवरी को राजगीर पहुंचा था। उसने चार अगस्त 2024 को कनार्टक के कुंबरहल्ली के पाइपलाइन रोड स्थित विनायक रोड में अपने 14 वर्षीय भांजे अमोघ कीर्ति की निर्मम हत्या कर दी थी। इसका कारण था कि अमोघ को मोबाइल गेम “फ्री फायर” की लत थी और वह हमेशा रुपयों की मांग करता रहता था। पुलिस अभिरक्षा में नागा ने बताया है कि उसने उस समय पहले भांजे का गला घोंटा था। फिर, उसके हाथ-पैर बांधकर गला रेत दिया था। अमोघ नागा की बहन शिल्पा का पुत्र था।
एक वर्ष तक जेल में रहने के बाद छूटा
इस मामले में नागा को कनार्टक पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वह करीब एक वर्ष तक जेल में रहने के बाद जमानत पर छूटा था। गौर हो कि कमरे में लटके मिले तीन महिलाओं के शव भी इसी स्थिति में पाए गए हैं। उनके हाथ-पैर रस्सी से बंधे थे। मुंह पर लाल रंग की टेप चिपकी थी।
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पहले मां और बहनों की हत्या
जबकि, नागा के मुंह पर टेप नहीं थी मगर हाथ बंधे थे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नागा ने पहले मां और बहनों की हत्या की। इसके बाद उसने हाथ बांधे और कुर्सी पर खड़े होकर फंदे में गर्दन घुसाई, फिर कूद गया होगा। थानेदार रमन कुमार ने बताया कि बेंगलुरु पुलिस से नागा का आपराधिक इतिहास पता चला है। सामूहिक आत्महत्या या मां व बहनों की हत्या कर स्वयं फंदे पर झूलना, दोनों ही बिंदुओं पर गहनता से छानबीन की जा रही है। अभी एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है।
इसलिए नागा ने बांधे थे दोनों हाथ
पुलिस ने उस हत्याकांड की भी जानकारी ली, जिसमें नागा ने भांजे की हत्या की थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस को मालूम हुआ कि उस समय उसने भांजे की हत्या करने के बाद वारदात में प्रयुक्त रसोईघर के चाकू को धो दिया था। इसके बाद उसने सामान बांधा और झील में कूदकर आत्महत्या करने का मन बनाया था, लेकिन बाद में विचार बदल डाला। वह राज्य से भागने के इरादे से बेंगलुरु के मैजेस्टिक बसअड्डा गया था, लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे। तीन दिन भटकने के बाद उसने सात अगस्त 2024 को कनार्टक के सोलादेवनाहल्ली थाने में आत्मसमर्पण कर दिया था। तब की परिस्थितयों के आधार पर ही ऐसी आशंका जताई जा रही है कि तीन हत्याएं करने के बाद उसका इरादा डगमगा नहीं जाए, इसलिए उसने इस बार फंदे पर झूलने से पहले हाथ बांध लिए थे।
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पिता से अलगाव के बाद मामा के करीब
शिल्पा का अपने बेटे की हत्या से करीब 11 महीने पहले पति से अलगाव हो गया था। वह चाचा के घर चली गई थी, जबकि अपने बेटे अमोघ को नागा के पास भेज दिया था। उसे उम्मीद थी कि नागा बेटे के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाएगा, लेकिन परिणाम सोच के विपरीत आया। उसी ने उसकी हत्या कर दी।एसआईटी ने जब कनार्टक पुलिस से बात की तो मालूम हुआ कि जमानत पर छूटने के बाद से नागा और उसका परिवार पड़ोसियों से भी बातचीत नहीं करता था। वे पूजा-पाठ में व्यस्त रहते थे। लगातार मंदिरों और धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर रहे थे। पुलिस मान रही है कि वह पश्ताचाप करने के लिए ऐसा कर रहे थे।नालंदा पुलिस ने बाजार में छानबीन की तो मालूम हुआ कि नागा या उसकी मां और बहनों ने कथित सामूहिक आत्महत्या में प्रयुक्त कोई भी सामान स्थानीय दुकान से नहीं खरीदा था। अनुमान है कि वे रस्सी और टेप साथ लेकर आए थे।




