जिंदल ग्रुप करेगा ग्रीन स्टील के लिए 70 हजार करोड़ का निवेश, हेमंत सोरेन की मुहिम का असर

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January 31, 2026

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में दावोस और यूनाइटेड किंगडम दौरे पर गए झारखंड सरकार के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। वैश्विक निवेश संवादों के बाद राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिली है। इसी कड़ी में प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह जिंदल समूह ने झारखंड में स्टील, परमाणु ऊर्जा और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से ₹70,000 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव दिया है।

यूनाइटेड किंगडम में हुई बैठकों के दौरान समूह के स्थायी प्रतिनिधि व अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने झारखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को निवेश प्रस्ताव से संबंधित लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) सौंपा। यह राज्य में दीर्घकालिक औद्योगिक विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा विकास के प्रति समूह की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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प्रस्तावित निवेश आने वाले वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू होंगे। इससे झारखंड की स्थिर नीति, निवेशक-अनुकूल शासन और संसाधन-आधारित औद्योगिक क्षमता पर घरेलू व वैश्विक निवेशकों का बढ़ता भरोसा स्पष्ट होता है। यह पहल औद्योगिक आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है।

स्टील सेक्टर में बड़ा निवेश: 6 MTPA इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट

निवेश प्रस्ताव का प्रमुख हिस्सा पतरातू में 6 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) क्षमता वाले इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट की स्थापना है। जिंदल स्टील द्वारा प्रस्तावित यह संयंत्र उन्नत, कम-उत्सर्जन तकनीकों पर आधारित होगा। यहां बुनियादी ढांचा, परिवहन, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए उच्च गुणवत्ता का स्टील तैयार किया जाएगा, जिससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन में झारखंड की भूमिका और सशक्त होगी।

लंदन में मुख्यमंत्री व राज्य प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “खनिज संसाधनों की उपलब्धता, कुशल मानव संसाधन और उद्योगों के प्रति प्रतिबद्ध सरकार—इन सबका अनूठा संगम झारखंड को निवेश के लिए आकर्षक बनाता है। यह प्रस्ताव राज्य के साथ हमारी साझेदारी को और मजबूत करेगा।”

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स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा: परमाणु और सौर परियोजनाएं

भारत सरकार द्वारा स्वच्छ, सुरक्षित और उद्योग-सहायक बेसलोड बिजली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आगे बढ़ाए जा रहे SHANTI (Small Modular Reactors & Advanced Nuclear Technology for India) अधिनियम के व्यापक नीति परिप्रेक्ष्य में झारखंड में 1,400 मेगावाट क्षमता की परमाणु ऊर्जा परियोजना का भी निवेश प्रस्ताव रखा गया है, जो सभी वैधानिक, सुरक्षा और नियामक स्वीकृतियों के अधीन होगा।

यह निवेश देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक डी-कार्बोनाइजेशन और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को मजबूती देगा। साथ ही उद्योगों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के लिए स्थिर, कम-कार्बन बेसलोड बिजली सुनिश्चित करेगा।

इसके अतिरिक्त, समूह ने 140 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना में भी निवेश का प्रस्ताव दिया है, जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप है और राज्य की औद्योगिक ऊर्जा सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगा।

60,000 से अधिक रोजगार और MSME आधारित समावेशी विकास

यह प्रस्ताव केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड के युवाओं के सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम है। प्रस्तावित परियोजनाओं से लगभग 11,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।

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इन निवेशों से लॉजिस्टिक्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), सेवा क्षेत्र और स्थानीय उद्यमिता में मजबूत मल्टीप्लायर इफेक्ट देखने को मिलेगा, जिससे झारखंड में समावेशी और सतत औद्योगिक विकास को नई मजबूती मिलेगी।

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