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रांची के अगवा बच्चों की रिहाई कराने वाले बजरंगदल के कार्यकर्ताओं को सम्मान क्यों नहीं ? बाबूलाल ने उठाए सवाल

रांचीः  झारखंड के  नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रांची के धुर्वा से अगवा दो बच्चों अंश और अंशिका की सकुशल रिहाई पर झारखंड पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं । बाबूलाल ने दावा किया है कि बच्चों को बजरंग दल के कार्यकर्तओं ने बरामद किया लेकिन झारखंड पुलिस नाम तक नहीं ले रही है ।

बाबूलाल ने कहा कि रामगढ़ के चितरपुर से बजरंग दल के कार्यकर्ता सचिन प्रजापति, डबलु साहु, सन्नी और उनके साथियों ने जिस दिलेरी से बच्चों को बरामद किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। तस्वीरें आपके सामने हैं, मैंने पहले भी पोस्ट किया था।इन तस्वीरों को देखकर कोई भी हकीकत और बयानबाज़ी के बीच के फ़ासले को आसानी से समझ सकता है कि सच क्या है और कुछ पुलिस वाले इसे किस तरीके से परोस कर पूरी वाहवाही हड़पने का घटिया प्रयास कर रहे हैं।

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बाबूलाल ने कहा कि पुलिस की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस देखकर चंद सवाल उभरते हैं। पुलिस ने अपनी पीठ तो थपथपा ली, लेकिन बरामद करने वाले बजरंग दल के इन युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए चंद शब्द तक नहीं कहे। अब श्रेय लेने की होड़ मचेगी और मनचाहे लोगों को चुन-चुन कर पुरस्कार बांटे जाएंगे।

मरांडी ने मांग की कि पुलिस अपनी गलती सुधारे और इन युवाओं को बुलाकर सम्मानित करे, ताकि आगे भी लोग मदद के लिए आगे आएं। दूसरों की पहचान और मेहनत को खा जाना एक ‘दलाल संस्कृति’ है और इससे बचा जाना चाहिए।

बाबूलाल ने हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी ने भी जो प्रशासन की प्रशंसा के पुल बांधे हैं, ऐसा लगता है कि उन्हें भी अधिकारियों ने सही जानकारी नहीं दी है। उन्हें भी धरातल की सच्चाई पता कर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में संशोधन करना चाहिए और असली नायकों को सम्मान देना चाहिए।

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