रांचीः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान महिला डॉक्टर के हिजाब को हटाने की कोशिश का मामला अब कानूनी मोड़ लेता दिख रहा है।झारखंड की राजधानी रांची के इटकी निवासी सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता मो. मुरतेजा आलम के अगुवाई में एक प्रतिनिध मण्डल ने इस संबंध में इटकी थाने में मुख्यमंत्री के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने हेतु आवेदन दिया है।शिकायतकर्ता मुरतेजा आलम के अनुसार, हाल ही में बिहार में आयोजित एक सरकारी नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर मौजूद एक मुस्लिम महिला डॉक्टर के हिजाब के साथ सार्वजनिक रूप से हस्तक्षेप किया।
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आरोप है कि मुख्यमंत्री ने कैमरों और भारी जनसमूह के सामने महिला के हिजाब को छूने और उसे हटाने का प्रयास किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर वायरल हो चुका है। आवेदन में मुख्यमंत्री के इस कृत्य को असंवैधानिक और अपमानजनक बताते हुए इसे धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन बताया साथ ही कहा है हिजाब मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक आस्था और निजता का अभिन्न अंग है।बिना सहमति इसे छूना अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। सार्वजनिक मंच पर किसी महिला के परिधान के साथ ऐसा व्यवहार उसकी लज्जा और शारीरिक स्वायत्तता पर सीधा आघात है।
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आत्मसम्मान को पहुंची ठेस
शिकायतकर्ता का कहना है कि एक मुख्यमंत्री से संविधान के रक्षक होने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इस आचरण ने समाज में असुरक्षा और अपमान की भावना पैदा की है। आवेदन में कहा गया है कि इस घटना से न केवल संबंधित महिला, बल्कि पूरे अल्पसंख्यक समुदाय और महिला वर्ग के आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। जो सामाजिक सौहार्द पर खतरा है
हिजाब केवल वस्त्र नहीं, महिला की पहचान और सम्मान है।
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सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति द्वारा किया गया ऐसा व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। न्याय और संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने के लिए कानूनी कार्रवाई की मांग किया है।पुलिस को दिए गए आवेदन में मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और उचित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। खबर लिखे जाने तक इस मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।




