रांची की जहरीली हो रही हवा, राजधानी में AQI अनहेल्दी; नहीं चेते तो बनेगा गैस चेंबर

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December 18, 2025

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दिल्ली में हवा के प्रदूषण को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। लेकिन यह खतरा सिर्फ दिल्ली, मुंबई, कोलकता या किसी अन्य मेट्रो सिटी तक सिमटा नहीं है। इसका असर अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी पड़ने लगा है। वायु प्रदूषण का असर अब झारखंड की राजधानी रांची में भी पड़ रहा है। शहर के कई हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अनहेल्दी श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे आम नागरिकों से लेकर बच्चों और बुजुर्गों तक के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

हाल के दिनों में AQI का स्तर 150 से ऊपर बना हुआ है, और कुछ इलाकों में यह 180 के करीब दर्ज किया गया है। प्रदूषण पर नियंत्रण के चौतरफा प्रयास करने होंगे। यह प्रशासनिक पहल और रांचीवासियों की जागरूकता से ही संभव हो पाएगा।

IQAir, AQI.in के आंकड़ों के अनुसार रांची का औसत AQI अनहेल्दी (151-200) की श्रेणी में है। कोकर चौक, डोरंडा, हरमू और गांधी नगर जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर विशेष रूप से ऊंचा रहा है। मुख्य प्रदूषक PM2.5 और PM10 हैं, जो सर्दियों में मौसमी स्थितियों के कारण और बढ़ जाते हैं।

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प्रदूषण का बुरा प्रभाव: आंकड़ों से समझें

प्रदूषक (Pollutant)औसत स्तर (µg/m³)   CPCB सुरक्षित सीमा (24 घंटे) स्वास्थ्य प्रभाव
PM2.5    70-90  60 µg/m³फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश, अस्थमा, हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर और सांस की तकलीफ बढ़ना
PM10100-120  100 µg/m³श्वसन तंत्र में जलन, खांसी, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत
AQI (समग्र) 160-185 0-50 (अच्छा)संवेदनशील लोगों (बच्चे, बुजुर्ग, अस्थमा रोगी) के लिए गंभीर जोखिम, सामान्य लोगों में भी सिरदर्द, थकान और जलन

ऐसे में जब रांची का AQI 174-183 की बीच में है, तब देश के कई बड़े शहरों, जैसे कि बेंगलुरु या चेन्नई की हवा अपेक्षाकृत साफ है। एक्स पर #RanchiPollutionCrisis हैशटैग के तहत रांची के जागरूक लोग इस पर अपनी चिंता भी व्यक्त कर रहे हैं। अब रांची भी प्रदूषित शहरों की सूची में ऊपर चढ़ता जा रहा है।

रांची में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण

रांची में हवा के प्रदूषण के पीछे कई कारण है। सबसे बड़ा कारण हर जगहों पर होने वाला कस्ट्रक्शन कार्य है। इस समय रांची में की जगहों पर ओवर ब्रिज बन रहा है। जहां पर खुदाई भी जारी है। नियमानुसार उन जगहों पर लगातार पानी का छिड़काव होना चाहिए। लेकिन कंपनी सिर्फ एक बार पानी का छिड़काव कर अपने जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेती है। इसके अलावा कई अन्य कारण भी हैं। चलिए इसको समझते हैं।

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तेज शहरीकरण और हरित क्षेत्र की कमी: विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई हुई है, जिससे प्राकृतिक धूल अवशोषक कम हो गए हैं। शहर के सीमेंट के जंगल बढ़ रहे हैं। पेड़ों की जगह पौधरोपण सिर्फ कागजों पर हुई है।

वाहनों की बढ़ती संख्या: पिछले कुछ वर्षों में वाहनों में 30 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। पुरानी डीजल गाड़ियां, ऑटो-रिक्शा और ट्रैफिक जाम से उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है।

निर्माण कार्यों से धूल: शहर में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से उड़ती धूल पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है। पानी छिड़काव या ग्रीन नेट का उपयोग कम हो रहा है।

कचरा प्रबंधन की कमी: खुले में कूड़ा जलाना, खासकर सर्दियों में, PM2.5 स्तर को अचानक बढ़ा देता है।

आसपास के औद्योगिक उत्सर्जन: छोटे-बड़े उद्योगों से निकलने वाला धुआं शहर तक पहुंच रहा है।

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समाधान की दिशा में उठाने होंगे कदम

झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB) ने क्लीन एयर प्लान को सख्ती से लागू करने का ऐलान किया है।

  • शहर में सघन वृक्षारोपण और वर्टिकल गार्डनिंग को बढ़ावा।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सब्सिडी, चार्जिंग स्टेशन और पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध।
  • सभी निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन, पानी छिड़काव और डस्ट कंट्रोल अनिवार्य।
  • ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर करना और खुले कचरा जलाने पर सख्त कार्रवाई।
  • जन जागरूकता अभियान और मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़ाना।
  • रांची को इस संकट से निकालने के लिए सरकार, प्रशासन और नागरिकों का सहयोग जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तुरंत कदम उठाए गए तो 2026 तक सुधार संभव है। नागरिक अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, मास्क पहनें और जागरूकता फैलाएं। स्वच्छ हवा हमारा अधिकार है, इसे बचाने का समय अब है।

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