- Advertisement -

JPSC- JSSC CGL मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई, सरकार ने दिया जवाब, कोर्ट ने कहा-100 % नियुक्तियां गलत नहीं, SIT की मॉनिटरिंग करेंगे रिटायर्ड जज

Picture of Live Dainik

Live Dainik

September 18, 2026

JPSC- JSSC CGL मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई, सरकार ने दिया जवाब, कोर्ट ने कहा-100 % नियुक्तियां गलत नहीं, SIT की मॉनिटरिंग करेंगे रिटायर्ड जज

रांचीः शुक्रवार को जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। झारखंड सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने को लेकर हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंपी। नियुक्तियों को रद्द किए जाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर अलग अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थियो को दी गई राहत को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक बरकरार रखी है।कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों को जांच में सहयोग करने को कहा, इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि जांच के नाम पर अभ्यर्थियों का शोषण नहीं होना चाहिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया। इस पर जवाब देने के लिए प्रार्थियों को 10 दिन का समय दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई सात अक्टूबर को होगी।अदालत ने सेवानिवृत्त जज जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को एसआईटी जांच की निगरानी के लिए नियुक्त किया है।

See also  असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी की स्टार प्रचारकों की सूची, झारखंड के चार बड़े नेता करेंगे प्रचार

कोर्ट ने कहा- सभी नियुक्तियां गलत नहीं
शुक्रवार को अदालत के पूर्व आदेश के आलोक में राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। शुक्रवार की सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की कोर्ट में हुई। सुनवाई में कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सभी नियुक्तियां सही तरीके से नहीं हुई हैं लेकिन एक तथ्य यह भी है कि सभी नियुक्तिओं में गड़बड़ी हुई है।
सरकार ने कोर्ट में दिया जवाब
JPSC को एक परीक्षा लेने और नियुक्ति देने में दो-तीन साल का समय लग जाता है ऐसे में एक झटके में 2700 नियुक्तियां रद्द कर देने से राज्य के कई अफसरों की नौकरी चली जाएगी। अदालत ने इस पूरे मामले की जांच की मॉनिटरिंग के लिए हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया है। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी आर. के. मल्लिक को अदालत ने नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। प्रार्थियो की ओर से वरीय अधिवक्ता और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, कुमार हर्ष, सोनल तिवार, सुभाष रसिक सोरेन समेत अन्य वकीलों ने बहस की वहीं राज्य सरकार की ओर से देश की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, राज्य के महाधिवक्ता रोहितस्य रॉय और JPSC की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल एवं उनके सहयोगी प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा।

See also  कॉपी के पन्नों को काटकर बिहार में शराब की तस्करी, मुजफ्फरपुर में तस्करों का जुगाड़ देख हैरान हुई पुलिस

नियुक्तियों की जांच पर कोर्ट की नजर
इस केस में IA (हस्तक्षेप याचिका) दायर करने वालों की ओर से अधिवक्ता टी सिंहदेव ने पक्ष रखा। अदालत अब इस मामले में अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को करेगा। बता दें कि JPSC और JSSC की ओर से आयोजित की गई अलग अलग परीक्षाओं के जरिये हुई भर्तियों को सरकार ने रद्द कर दिया है जिसके बाद इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त किए गए कर्मचारियों और अधिकारियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है और सरकार के आदेश को चुनौती दी है। अब तक हुई सुनवाई में प्रार्थियों को राहत मिली है और हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now