धनबादः व्यवस्था से तंग आकर धनबाद के मधुलिका स्वीट्स ने अपने सारे आउटलेट बंद कर दिए हैं। अब 44 साल पुराने मुधिलका स्वीट्स में मिठाई नहीं मिलेगी। मधुलिका स्वीट्स ने धनबाद के अपने सभी पांचों आउटलेट एक साथ बंद कर दिए। दो दिन पहले ही इन्हें बंद किया गया। चास का एक आउटलेट पिछले महीने ही बंद हो गया था। मधुलिका स्वीट्स के मालिक जयप्रकाश चौरसिया ने बताया कि धनबाद में बिजनेस करना मुश्किल हो गया है।
कभी खाने में कीड़ा निकलने की बात कह कर तो कभी मिठाई में खट्टापन कहकर टारगेट किया जा रहा था। ब्यूरोक्रेसी अलग से हावी हो गया था। बहुत कुछ खुलकर तो नहीं बोल सकते, लेकिन धनबाद में फूड का बिजनेस करना अब उतना सरल नहीं रहा। चौतरफा दबाव पड़ता है। फुटपाथ पर फूड का बिजनेस आ गया है। इनके लिए कोई नियम कानून नहीं है। सारा जोर हम पर चलता है। अपने सभी कर्मचारियों को पेमेंट देकर छुट्टी दे दी गई।
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मधुलिका स्वीट्स का आउटलेट बैंक मोड़, सरायढेला, हीरापुर, मेमको मोड़ और हाउसिंग कॉलोनी में संचालित था। जय प्रकाश चौरसिया ने कहा कि सभी आउटलेट्स की प्रापर्टी हमारी अपनी है। कुछ न कुछ तो बिजनेस करेंगे, थोड़ा समय चाहिए। मधुलिका स्वीट्स 44 वर्षों से धनबादवासियों के बीच मिठास के लिए जाना जाता रहा है।
हीरापुर-हाउसिंग कॉलोनी आउटलेट की हर दिन 50 हजार थी आमदनी
मधुलिका स्वीट्स के सूत्रों के अनुसार हीरापुर और हाउसिंग कॉलोनी आउठलेट की आमदनी हर दिन लगभग 50 हजार रुपये होती थी। त्योहारी सीजन में यह बढ़कर 70 हजार रुपये प्रतिमाह पहुंच जाती थी। प्रत्येक आउटलेट में पांच स्टाफ यानी पांचों मिलाकर 25 स्टाफ कार्यरत थे। इसी तरह मिठाई की फैक्ट्री में 40 कर्मी कार्यरत थे। अब सभी बेरोजगार हो गए।
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नगर निगम का एक लाख वाटर टैक्स भी बाकी
मधुलिका स्वीट्स के बंद होते ही नगर निगम का एक लाख रुपये वाटर टैक्स भी डूब गया। नगर निगम का मधुलिका स्वीट्स के हीरापुर प्रतिष्ठान पर 2019 से लेकर अभी तक लगभग एक लाख रुपये वाटर टैक्स बाकी था। इसके बंद होने से इस राशि के मिलने की संभावना भी कम हो गई है।
जमीन विवाद भी चर्चा में
सूत्रों के अनुसार मधुलिका स्वीट्स के मालिका जयप्रकाश चौरसिया और उनके भाई अशोक चौरसिया के बीच प्रापर्टी विवाद भी सामने आ रहा है। चर्चा है कि हाल ही में कुछ जमीन भी बेची गई है। इसके लेनदेन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था।
1984 में एक हजार रुपये से हुई थी शुरुआत
मधुलिका स्वीट की स्थापना 1984 में हुई थी। मात्र एक हजार रुपये से शुरुआत हुई थी। समय के साथ यह पूरे धनबाद क्षेत्र की सबसे बेहतरीन मिठाई की दुकान बन गई है।लोग अपनी सुविधानुसार मिठाइयां, नमकीन, लस्सी और सूखे मेवे लेते थे। होम डिलीवरी और टेकअवे विकल्प के तौर पर उपलब्ध था।




