INDIA के कितने दलों के सांसदों ने की क्रॉस वोटिंग? इन नामों की चर्चाएं, विपक्ष खोज रहा जवाब

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Live Dainik

September 11, 2025

vice president election

भारतीय जनता पार्टी ने उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग के संकेत दिए हैं। हालांकि, विपक्ष सवाल उठा रहा है कि मतदान तो सीक्रेट था, तो भाजपा क्रॉस वोटिंग के आरोप कैसे लगा रही है। दरअसल, निर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को समर्थन से 14 वोट ज्यादा मिले, जिसके चलते क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। फिलहाल, साफ नहीं है कि किन दलों ने क्रॉस वोटिंग की। खबर है कि विपक्ष इस गणित को सुलझाने में लगा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष के एक गैर कांग्रेसी नेता ने बताया कि विपक्ष के नेता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अवैध मतदान या क्रॉस वोटिंग के कारण कम से कम 10 वोटों का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष में आंतरिक चर्चाएं हैं कि आम आदमी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी) और झारखंड मुक्ति मोर्चा को वोटों का नुकसान हुआ है। हालांकि, ये सिर्फ अनौपचारिक आंतरिक चर्चा पर आधारित निष्कर्ष है, क्योंकि सीक्रेट बैलेट होने के कारण यह पताना असंभव है कि किस सांसद ने किसे मत दिया है।

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रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि डीएमके, तृणमूल, आरजेडी, वाम दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस और छोटी सहयोगी पार्टियों ने 100 फीसदी वोट दिए। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस से एक वोट पर संदेह है। समाजवादी पार्टी और शिवसेना से तीन-तीन वोट खराब गए। आप के 4 सांसदों ने या तो क्रॉस वोट किया या वोट अवैध हो गए।’ नेताओं को संदेह है कि एनसीपी (एसपी) और जेएमएम से कम से के दो वोट विपक्ष के खाते में नहीं आए।

नेता ने एचटी को बताया, ‘वीसीके, एसपी, केरल कांग्रेस (मणि) की तरफ से विपक्ष को 100 प्रतिशत वोट मिले हैं।’ विपक्षी दलों ने बुधवार को उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन राज्यसभा के सभापति का कार्यभार संभालने के बाद उनकी बात सुनेंगे और संसद के उच्च सदन में आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए अधिक मौका देंगे। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने के एक दिन बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्हें शुभकामनाएं दीं।

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राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राधाकृष्णन को विपक्षी दलों की ओर से दिए गए नोटिस को स्वीकार करना चाहिए और उन्हें रोकना नहीं चाहिए।

ओ ब्रायन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि राधाकृष्णन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा विधेयक संसदीय समितियों के विचार के लिए भेजे जाएं। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर निलंबन नहीं होने चाहिए।

तृणमूल नेता ने कहा, ‘2009 से 2016 के बीच आठ वर्षों में राज्यसभा में चर्चा के लिए 110 नोटिस स्वीकार किए गए। अगले आठ वर्षों में, 2017 से 2024 के बीच, यह संख्या घटकर मात्र 36 रह गई।’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने कहा कि नए सभापति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विपक्ष को भी साथ लेकर चला जाए और उसे उचित समय एवं मौके दिए जाएं।

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