डेस्कः पटना हाई कोर्ट ने बिहार के नवादा से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पूर्व विधायक और बाहुबली राजबल्लभ यादव को नाबालिग से रेप के मामले में गुरुवार को बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने माना कि पीड़िता से जबरन रेप के सबूत नहीं हैं। मेडिकल जांच में डॉक्टर ने पाया कि पीड़िता यौन संबंध बनाने की आदी थी। उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाने के कोई साक्ष्य नहीं पाए गए। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि पीड़िता की उम्र 18 साल से कम है। बता दें कि राजबल्लभ यादव को 2018 में निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिली थी।
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कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के कपड़ों को एफएसएल (फॉरेंसिक) जांच के लिए भेजा था, लेकिन उसकी रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया। इस वजह से अपीलकर्ताओं (राजबल्लभ समेत अन्य) को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा 21 दिसंबर 2018 को सुनाए गए सजा के आदेश को निरस्त कर दिया। पटना हाई कोर्ट ने माना कि बलात्कार का आरोप लगाने वाली पीड़िता यौन संबंध बनाने की आदी थी। साथ ही उसके साथ जबरन संबंध बनाने के कोई सबूत नहीं पाए गए हैं।
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पटना हाई कोर्ट ने इस केस में पूर्व विधायक राजबल्लभ प्रसाद उर्फ राजबल्लभ यादव सहित सुलेखा देवी, राधा देवी, संदीप सुमन उर्फ पुष्पंजय, तुसी देवी और छोटी देवी उर्फ अमृता को सभी आरोपों से बरी करते हुए तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया। गुरुवार को जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने एक साथ 6 आपराधिक अपील पर सुनवाई पूरी कर 315 पन्ने का आदेश जारी किया।
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बता दें कि यह मामला साल 2016 का था। लड़की ने बिहारशरीफ के महिला थाने में बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। पीड़िता नालंदा जिले के रहुई थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई गई थी। वह बिहारशरीफ में एक किराये के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही थी। शिकायत में उसने बताया था कि उसकी पड़ोसन सुलेखा देवी एक बार उसे बर्थडे पार्टी का झांसा देकर कहीं ले गई थी। वहां पर उसके साथ बलात्कार किया गया। रेप का आरोप पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव पर लगा था।




