रांची: रांची के लेक व्यू अपार्टमेंट में रहने वाली आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता नीलम बिरुली की मौत ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। नीलम का शव बी ब्लॉक के फ्लैट नंबर 416 में फांसी के फंदे से लटका मिला। घटना के बाद जहां पुलिस इसे प्रारंभिक तौर पर आत्महत्या का मामला मान रही है, वहीं नीलम के परिजन इसे साफ-साफ हत्या बता रहे हैं और पति को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
लंबे समय से चल रहा था वैवाहिक विवाद
नीलम बिरोली आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ट्रेड फेयर और फेस्टिवल में सक्रिय रहती थीं। परिवार और नजदीकी दोस्तों के मुताबिक, पिछले कई महीनों से उनका अपने पति से विवाद चल रहा था। नीलम की मां और छोटी बहन का आरोप है कि उनके पति का एक महिला, अनीता चौधरी, के साथ अवैध संबंध था। इसी को लेकर दंपति के बीच बार-बार झगड़े होते थे।
नीलम की बहन ने मीडियो बताया कि 1 जून को भी पति ने उनका गला दबाकर मारने की कोशिश की थी, लेकिन वह किसी तरह बच गईं। इसके बाद परिवार ने एफआईआर भी दर्ज करवाई थी, लेकिन नीलम ने रिश्ते को बचाने के लिए समझौता कर लिया।
घटना के दिन का सिलसिला
घटना वाले दिन दोपहर 2 बजे पति-पत्नी के बीच जोरदार झगड़ा हुआ। घर में काम करने वाली मेड के अनुसार, विवाद के दौरान नीलम के पति ने “बच्चा उनका नहीं है” जैसी बातें कहीं। झगड़े के बाद पति करीब दो घंटे तक अपार्टमेंट परिसर में बैठकर फोन पर बात करते रहे और फिर बाहर चले गए। शाम करीब 6:30 बजे पड़ोसियों ने दरवाजा खोलकर नीलम को फंदे से लटका पाया।
संदिग्ध हालात और साक्ष्य
परिवार का कहना है कि नीलम आत्महत्या करने वाली महिला नहीं थीं। कमरे में टूटे चश्मे और कांच के टुकड़े मिले हैं, जिससे संघर्ष के संकेत मिलते हैं। उनका कहना है कि पति ने हत्या के बाद इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की।
नीलम की एक नजदीकी मित्र माला खजूर ने भी बताया कि मृतका मानसिक रूप से मजबूत महिला थीं और कभी खुदकुशी का कदम नहीं उठातीं। उन्होंने दावा किया कि नीलम ने उन्हें पति और उसकी कथित प्रेमिका के रिश्ते को लेकर कई बार अपनी पीड़ा बताई थी।
पुलिस जांच जारी
फिलहाल नीलम का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और एक मेडिकल बोर्ड गठित किया जा रहा है। पुलिस ने पति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मृतका के परिजन आरोपी को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं। यह मामला न केवल एक पारिवारिक विवाद के दुखद अंत की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मानसिक और भावनात्मक हिंसा किस तरह जीवन को खत्म करने वाली त्रासदी में बदल सकती है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह आत्महत्या थी या योजनाबद्ध हत्या।




