ओबीसी ‘क्रीमी लेयर’ के लिए इनकम लिमिट फिर से तय करने की जरूरत: संसदीय समिति

Picture of Live Dainik

Live Dainik

August 9, 2025

Jharkhand में पिछड़ा वर्ग आयोग ने OBC आरक्षण 27 % करने की अनुशंसा भेजी

डेस्कः पिछड़ा वर्ग मामलों की संसदीय समिति की शुक्रवार को मीटिंग हुई। इस मीटिंग के बाद समिति ने सिफारिश की है कि ओबीसी की क्रीमी लेयर की लिमिट में संशोधन करने की जरूरत है। समिति ने कहा कि मौजूदा सीमा पात्र ओबीसी वर्ग के परिवारों के एक बड़े वर्ग को आरक्षण के लाभ और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित कर रही है। शुक्रवार को संसद में पेश की गई अपनी आठवीं रिपोर्ट में समिति ने उल्लेख किया कि आय सीमा को 6.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये प्रति वर्ष करने संबंधी संशोधन 2017 में किया गया था।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के नियमों के अनुसार इस सीमा की समीक्षा हर तीन साल पर या जरूरत पड़ने पर उससे पहले भी की जा सकती है। भाजपा सांसद गणेश सिंह की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति ने कहा, ‘वर्तमान सीमा कम है, जिसके दायरे में ओबीसी का केवल एक छोटा सा हिस्सा आता है।’ उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति और निम्न आय वर्ग की बढ़ती आय के कारण इसमें वृद्धि करना ‘समय की मांग’ है। समिति ने कहा, ‘समिति इस तथ्य से अवगत है कि ओबीसी क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आय सीमा की समीक्षा हर तीन साल पर या निर्धारित अवधि से पहले भी की जानी चाहिए। हालांकि, 2017 से इसमें संशोधन नहीं किया गया।’

See also  धनबाद विधायक राज सिन्हा को राजनाथ सिंह के मंच पर नहीं मिली जगह, ढुल्लू महतो के खिलाफ प्रचार करने के लिए मिल चुका है पार्टी का नोटिस

प्यार में मिला धोखा, गर्लफ्रेंड के घर के पास प्रेमी ने खुद को गोली से उड़ाया

रिपोर्ट के अनुसार, ‘समिति स्पष्ट शब्दों में वर्तमान क्रीमी लेयर सीमा की समीक्षा करने और इसमें संशोधन करने की अपनी सिफारिश दोहराती है, ताकि ओबीसी के अधिक से अधिक लोगों को इसमें शामिल किया जा सके। इससे अंततः उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को संतोषजनक स्तर तक लाने में मदद मिलेगी।’ हालांकि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने समिति को बताया कि क्रीमी लेयर की सीमा में संशोधन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। समिति द्वारा उठाया गया एक और अनसुलझा मुद्दा क्रीमी लेयर की स्थिति निर्धारित करने के लिए स्वायत्त निकायों और सरकारी पदों के बीच समतुल्यता का अभाव है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की समतुल्यता के अभाव के कारण योग्य ओबीसी उम्मीदवारों, जिनमें यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं, को सेवा आवंटन से वंचित कर दिया गया है क्योंकि उनके माता-पिता के वेतन को पद समतुल्यता पर विचार किए बिना ही जोड़ा गया था। समिति ने मंत्रालय से इस मामले को सुलझाने के लिए 2023 में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा गठित अंतर-विभागीय समिति के साथ काम में तेजी लाने का आग्रह किया।

See also  बीजेपी सांसद मनीष जायसवाल का अजीब फेसबुक पोस्ट, 80 % एकजुट हैं तो 20 % कौन कर रहा विरोध ?

खचरी है, मोकामा में बढ़िया काम नहीं की; MLA पत्नी नीलम देवी पर ही भड़कने लगे अनंत सिंह

अनंत सिंह को चुनौती देने वाले मोनू सिंह को STF ने दबोचा, मोकामा पचमहला गोलीकांड में हुई गिरफ्तारी

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now