रांचीः झारखंड सरकार ने 1999 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे का निलंबन समाप्त कर दिया है।निलंबन मुक्त होने के साथ ही उन्होंने झारखंड के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में आधिकारिक रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए योगदान दे दिया है। प्रशासनिक गलियारों में इसे एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय से वह कानूनी मामलों के चलते जांच के दायरे में थे।
विनय चौबे की गिरफ्तारी शराब घोटाले में मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों के साथ साजिश रचकर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में हुई थी। इसके बाद उनके खिलाफ दो और मामले दर्ज किए गए। दोनों मामलों में उन पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर गलत तरीके से अपने करीबी के नाम पर म्यूटेशन कराने का आरोप है। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर निकले थे।

जल्द मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
कार्मिक विभाग में योगदान देने के बाद अब नौकरशाही में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि सरकार उन्हें जल्द ही किसी महत्वपूर्ण और बड़े महकमे की कमान सौंप सकती है। इससे पहले वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के अलावा जल संसाधन, योजना-सह-वित्त और आबकारी जैसे प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि एक अनुभवी अधिकारी के रूप में उनकी मुख्यधारा में वापसी से कई अटके हुए प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं को गति मिल सकती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सुगबुगाहट
भ्रष्टाचार के आरोपों और कानूनी प्रक्रियाओं के लंबे दौर के बाद उनकी यह वापसी राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर विपक्षी दल इस नियुक्ति और उनकी वापसी पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।वहीं प्रशासनिक अमले में इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार उन्हें किस विभाग की जिम्मेदारी देती है। फिलहाल कार्मिक विभाग में योगदान के बाद उनकी नई पोस्टिंग के आदेश का इंतजार किया जा रहा है।





