रांचीः झारखंड में नगर निकाय चुनाव कराने को लेकर हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई और कोर्ट ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने इस मामले को लेकर राज्य के मुख्य सचिव को हाजिर होने का आदेश दिया है।
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स्थानीय शहरी निकाय चुनाव कराने को लेकर पार्षद रोशनी खलखो vs झारखण्ड सरकार मामले में झारखंड उच्च न्यायालय मे आज जस्टिस माननीय आनंदा सेन जी के कोर्ट में दिनांक 04/01/2024 के आदेश तीन हफ्ते में चुनाव कराने के आदेश के संबंध में अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई, प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने पक्ष रखा, माननीय न्यायालय ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा की यहां सरकार कोर्ट के आदेश को बाईपास कर राज्य में रूल ऑफ लॉ का गला घोंट रही है, राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल है, न्यायालय ने अगली सुनवाई अगले शुक्रवार को रखते हुए मुख्य सचिव को सशरीर उपस्थित रहने का आदेश दिया है जिसमे कोर्ट की अवमानना मामले में मुख्य सचिव पर चार्ज फ्रेम किया जाएगा।
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राज्य के 48 नगर निकायों का चुनाव ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट के पेंच की वजह से फंसा हुआ है। राज्य के मुख्य सचिव को 25 जुलाई 2025 को सशरीर उपस्थित होने का आदेश कोर्ट ने दिया है। राज्य सरकार की ओर से ट्रिपल टेस्ट को अंतिम रूप देने की बात कही जा रही थी इसी बीच हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव को लेकर तल्ख टिप्पणी कर दी है।
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अप्रैल 2023 में ही समाप्त हो गया झारखंड में सभी नगर निकायों का कार्यकाल
उल्लेखनीय है कि झारखंड में सभी नगर निकायों का कार्यकाल अप्रैल 2023 में ही समाप्त हो गया है। नए कार्यकाल के लिए चुनाव 27 अप्रैल, 2023 तक करा लिए जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है। इसके पीछे की वजह यह है कि राज्य सरकार ने नगर निकायों का नया चुनाव कराने के पहले ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत तय करने के लिए राज्य में ट्रिपल टेस्ट कराने का फैसला लिया है और इसकी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।




