रांचीः बोकारो से कांग्रेस पार्टी की विधायक श्वेता सिंह की मुश्किलें बढ़ने वाली है। राजभवन ने निर्वाचन आयोग से पूछा है कि श्वेता सिंह का मामला ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का बनता है या नहीं। श्वेता सिंह के नाम से बीएसएल और एचएससीएल में दो क्वार्टर आवंटित है। इसका किराया भी बकाया है। लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान श्वेता सिंह ने अपने शपथ पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया था।
बोकारो विधायक श्वेता सिंह के नाम पर 2 पैन ID , दोनों में पिता का नाम अलग, वोटर आइकार्ड तीन
बीजेपी के पूर्व विधायक बिरंची नारायण ने राज्यपाल, मुख्य चुनाव आयुक्त और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से इसकी शिकायत की थी। राजभवन और मुख्य चुनाव आयुक्त ने सीईओ से इसकी रिपोर्ट मांगी। फिर सीईओ ने बीएसएल और एचएससीएल को जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा। इन दोनों सीईओ को भेजी रिपोर्ट में कहा कि श्वेता सिंह के नाम दो क्वार्टर आवंटित है। सेक्टर तीन में क्वार्टर संख्या 562 का किराया 2.77 लाख और क्वार्टर संख्या 873 का किराया 97 हजार रुपया बकाया है। श्वेता सिंह ब्रह्रा सर्विस सोसाइटी की सचिव है। इसीलिए उन्होने क्वार्टर संख्या 873 लिया है। इसके बाद सीईओ ने राजभवन और निर्वाचन आयोग को इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि श्वेता सिंह ने शपथ पत्र में यह बात छिपाई थी।
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इस मामले में बीजेपी ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर दावा किया था कि यह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री आदित्य प्रसाद साहू ने राज्यपाल से मिलकर इस मामले की जांच कराने और श्वेता सिंह की विधायकी रद्द करने की मांग की थी।
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आयकर विभाग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को बताया था कि श्वेता सिंह के नाम पर दो पैन कार्ड हैं। एक गुरूग्राम और दूसरा रामगढ़ में बना है। दोनों में जन्म तिथि 19 जून 1984 दर्ज है। गुरूग्राम में जारी पैन कार्ड में पिता का नाम दिनेश कुमार सिंह और रामगढ़ वाले कार्ड में पिता का नाम संग्राम सिंह दर्ज है, जो उनके पति का नाम है।
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बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जमुई निर्वाची पदाधिकारी से प्राप्त जानकारी के आधार पर झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को बताया कि श्वेता सिंह के नाम से जमुई में वोटर आईडी कार्ड है। उसे निरस्त कर दिया गया है। नियमतः एक व्यक्ति के पास एक से अधिक वोटर आईडी नहीं होनी चाहिए।




