ANI पर Youtuber का ब्लैकमेलिंग का आरोप, राजस्थान सरकार का Live Streaming टेंडर ANI को मिलने पर भी विवाद

ani is blackmailing

डेस्कः निजी समाचार एजेंसी एशिया न्यूज इंटरनेशनल (ANI) पर एक Youtuber मोहक मंगल ने जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है । सोशल मीडिया एक्स पर जारी अपने वीडियो में आरोप लगाया है कि मजह कुछ सेकेंड के वीडियो इस्तेमाल के लिए ANI ने उनके यूट्यूब चैनल पर स्ट्राइक मार दिया है  । मोहक मंगल ने आरोप लगाया है कि ANI की ओर से उनसे अड़तालीस लाख रुपए का डिमांड किया गया है । 

मोहक मंगल ने ANI पर ये भी आरोप लगाया है कि कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप को खत्म करने के लिए सालाना सब्सक्रिपेशन लेने पर जोर दिया । आरोप है कि ANI की ओर से इस संबंध में बारगेन किया गयाा । मोहक मंगल ने इस संबंध में सूचना प्रसारण मंत्रालय को भी चिट्ठी लिखी है । सोशल मीडिया पर काम करने वाले कई क्रिएटेर्स इससे पहले कई बार समाचार एजेंसी ANI पर इस तरह के आरोप लगा चुके हैं । 

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इधर अंग्रेजी वेब पत्रिका द वायर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर ANI को राजस्थान सरकार के लाइव स्ट्रीमिंग का ठेका दिए जाने पर सवाल खड़े किए हैं । द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान सरकार ने हाल ही में एएनआई न्यूज़ एजेंसी की मालिक कंपनी ANI Media Private Limited को राज्य सरकार के कार्यक्रमों की लाइव स्ट्रीमिंग सेवाएं प्रदान करने का ठेका दिया है।

द वायर के मुताबिक -हालांकि, सार्वजनिक रिकॉर्ड यह दिखाते हैं कि यह ठेका एक टेंडर प्रक्रिया के जरिए ANI Media को दिया गया, जिसमें दो अन्य कंपनियों ने भी बोली लगाई थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों अन्य कंपनियाँ ANI Media से गहराई से जुड़ी हुई हैं — न केवल इन तीनों कंपनियों के कुछ निदेशक समान हैं, बल्कि इनकी डाक पते भी आपस में बहुत समान या जुड़े हुए हैं।

सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी टेंडर की वैधता के लिए कम से कम तीन बोलीदाताओं का होना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया में तीन कंपनियाँ तो थीं, लेकिन तीनों आपस में निकट संबंध रखने वाली थीं — जिससे नैतिकता, हितों के टकराव और अनियमितताओं के गंभीर सवाल उठते हैं।

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, ANI Media के तीन निदेशक अन्य दो कंपनियों के भी निदेशक हैं। इतना ही नहीं, ANI Media और उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी Asian Film Pvt Ltd के प्रबंध संपादक (मैनेजिंग एडिटर) भी एक ही व्यक्ति हैं। यह सब संकेत देते हैं कि संभवतः टेंडर प्रक्रिया में बोली की मिलीभगत (bid rigging) हुई हो और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाया गया हो।

यह मामला राजस्थान सरकार के नियमों के खिलाफ एक संभव अनुचित ठेके की मिसाल बन सकता है, जिस पर निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

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