रामगढ़ः एसीबी हजारीबाग की टीम ने रामगढ़ जिला प्रोबेशन कार्यालय में एक कर्मी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इस दौरान प्रोबेशनल अफसर सिमरन कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। एसीबी के अनुसार, रजरप्पा के बड़कीपोना निवासी त्रिदेव कुमार ने शिकायत की थी उनके परिवार को सरकार की ओर से अनुदान राशि मिलनी है। इसमें वृद्धि के लिए उन्होंने प्रोबेशनल अफसर सिमरन कुमारी से अनुरोध किया था। आरोप है कि प्रोबेशनल अफसर के कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर सुजीत पासवान ने सत्यापन प्रतिवेदन भेजने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसके बाद हजारीबाग एसीबी ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें आरोप को सही पाया गया।
मंगलवार को ट्रैप टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। इस दौरान सुजीत पासवान को शिकायतकर्ता से पांच हजार रुपये घूस लेते रंगेहाथ पकड़ लिया गया। इसके बाद मामले की नामजद अभियुक्त सिमरन कुमारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई और उनके विरुद्ध आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता त्रिदेव कुमार के पिता की मृत्यु जेल में हुई थी। इसके बाद आश्रित परिवार को सरकारी प्रावधानों के तहत अनुदान राशि दिए जाने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी मामले से जुड़े सत्यापन और अनुदान राशि बढ़ाने के नाम पर घूस मांगने का आरोप सामने आया है। वहीं सिमरन कुमारी के संबंध में बताया जाता है कि वह झारखंड लोक सेवा आयोग से चयनित अधिकारी हैं और वर्तमान में रामगढ़ में प्रोबेशन ऑफिसर के पद पर पदस्थापित थीं।
एसीबी कार्यालय की ओर से की गई पुष्टि
हजारीबाग एसीबी कार्यालय द्वारा प्रेस रिलीज जारी कर बताया गया कि रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना अंतर्गत ग्राम व पोस्ट बड़की पोना निवासी बाबू चन्द राम के 27 वर्षीय पुत्र त्रिदेव कुमार ने हजारीबाग एसीबी के पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत की थी। जिसमें बताया गया था कि त्रिदेव कुमार के परिवार को सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की अनुदान राशि मिलनी थी।इस अनुदान राशि में वृद्धि कराने के लिए जब त्रिदेव कुमार ने जिला प्रोबेशन ऑफिसर सिमरन कुमारी से मिलकर अनुरोध किया, तो उन्होंने अपने कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर सुजीत से मिलने को कहा। जब आवेदक सुजीत से मिला, तो उसने सत्यापन प्रतिवेदन भेजने के नाम पर सीधे 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर दी। चूंकि त्रिदेव कुमार घूस नहीं देना चाहते थे, इसलिए इन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हजारीबाग का रुख किया और कानूनी कार्रवाई के लिए आवेदन दे दिया।







