Harvard University में हजारों भारतीय छात्रों का भविष्य खतरे में लटका, ट्रंप ने देश से बाहर करने की दी धमकी

harvard

डेस्क:  अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों का भविष्य खतरे में मंडरा रहा है।राष्ट्रपति ट्रंप ने बाहरी छात्रों पर हमला बोला है । वाशिंगटन पोस्ट में छपी खबर के मुताबिक  अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security – DHS) ने गुरुवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की विदेशी छात्रों को दाखिला देने की अनुमति (SEVP सर्टिफिकेशन) रद्द कर दी है। यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के अनुरूप लिया गया है और इससे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी तथा ट्रंप प्रशासन के बीच टकराव और तेज हो गया है।

गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने आदेश दिया कि हार्वर्ड विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकता और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय छात्रों को या तो स्थानांतरित होना होगा या फिर अपना कानूनी दर्जा खोना पड़ेगा। विभाग ने विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया है कि वह “अमेरिका विरोधी और आतंक समर्थक” विदेशियों को प्रश्रय दे रहा है, जो अन्य छात्रों को धमकाते हैं, हमला करते हैं और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को बाधित करते हैं। साथ ही हार्वर्ड पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अर्धसैनिक गुट के साथ सहयोग करने का भी आरोप लगाया गया है।

See also  झारखंड के इस जिले में तोड़े जाएंगे 206 घर, एनजीटी के नोटिस के बाद सरकार रेस

DHS ने हार्वर्ड को चेतावनी दी है कि यदि वह 72 घंटे में अंतरराष्ट्रीय छात्रों से संबंधित रिकॉर्ड, वीडियो, ऑडियो और अनुशासनात्मक जानकारी नहीं सौंपता तो उसकी मान्यता पूरी तरह से रद्द कर दी जाएगी।

हार्वर्ड के प्रवक्ता जेसन न्यूटन ने इसे “अवैध और प्रतिशोधात्मक कदम” करार दिया और कहा कि विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय छात्रों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि 2024-2025 शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय में 6,793 अंतरराष्ट्रीय छात्र नामांकित थे, जो कुल छात्रों का लगभग 27% हैं।

इस कदम को ट्रंप प्रशासन की ओर से हार्वर्ड पर लगातार दबाव बनाए रखने के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले भी विश्वविद्यालय को 2.7 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग में कटौती और टैक्स छूट खत्म करने की धमकी दी गई थी।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा, “हार्वर्ड अब एक ऐसा संस्थान बन चुका है जो अमेरिका विरोधी, यहूदी विरोधी और आतंक समर्थक विचारों का केंद्र है। विश्वविद्यालय को अपने कार्यों के परिणाम भुगतने होंगे।”

See also  जगदीप धनखड़ इस्तीफे के 53 दिन बाद पहली बार आए नजर, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथग्रहण में हुए शामिल

फाउंडेशन फॉर इंडिविजुअल राइट्स एंड एक्सप्रेशन के कानूनी निदेशक विल क्रीली ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह खुद अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि DHS द्वारा पांच वर्षों की विरोध प्रदर्शन से जुड़ी ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग चिंताजनक और असंवैधानिक है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now