निशिकांत दुबे को जेल भेजे सुप्रीम कोर्ट, बीजेपी सांसद के CJI वाले बयान पर भड़का विपक्ष

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दिल्लीः देश के मुख्य न्यायधीश जस्टिस संजीव खन्ना पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने निशिकांत दुबे के इस बयान को घटिया बताते हुए उन पर तुरंत एक्शन लेने की मांग की है। इस दौरान आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को कल ही निशिकांत दुबे को जेल भेज देना चाहिए। कांग्रेस ने भी इस बयान को अपमानजनक करार दिया है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट पर ऐसा बयान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

निशिकांत दुबे के बयान पर बात करते हुए आप प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा, “उन्होंने बहुत घटिया टिप्पणी की है। मुझे उम्मीद है कि कल ही सुप्रीम कोर्ट निशिकांत दुबे के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करेगा और उन्हें जेल भेजेगा।” उन्होंने आगे कहा, “हमने पिछले कुछ सालों ने देखा है कि जब भी कोई जज भाजपा के पक्ष में फैसला देता है तो उनकी गलतियां माफ कर उन्हें राज्यसभा भेज दिया जाता है और अब जब एक जज ने हिदायत दी कि कानून का पालन किया जाना चाहिए और राज्यपाल बिलों को अनिश्चित काल तक नहीं रख सकते, तो भाजपा ने अपना पूरा तंत्र उन जजों को बदनाम करने और सुप्रीम कोर्ट पर हमला करने के लिए लगा दिया है।”

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कांग्रेस ने बताया अपमानजनक

कांग्रेस ने भी इस बयान को अपमानजनक करार दिया है। कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने निशिकांत दुबे की सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी को लेकर कहा, “यह सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक बयान है। निशिकांत दुबे एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने पहले भी कई संस्थानों पर हमले किए हैं। अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर हमला किया है। मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश इसे ध्यान में रखेंगे क्योंकि वह संसद में नहीं बल्कि संसद के बाहर बोल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट पर यह हमला स्वीकार्य नहीं है।”

हताशा समझ से परे- इमरान मसूद

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता का यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मसूद ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जिस तरह के बयान आ रहे हैं, वे बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। यह पहली बार नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण बहुमत वाली सरकार के खिलाफ फैसला दिया है। यह हताशा समझ से परे है।”

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किस बयान पर छिड़ा संग्राम?

बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधा। दुबे ने पोस्ट में लिखा, “कानून यदि सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा, तो संसद भवन को बंद कर देना चाहिए।” इसके बाद निशिकांत दुबे ने मीडिया से बात करते हुए मुख्य न्यायधीश जस्टिस संजीव खन्ना पर एक बयान देकर विवाद को और भड़का दिया। एक सवाल के जवाब पर दुबे ने जवाब दिया, “इस देश में जितने भी गृह युद्ध हो रहे हैं उसके लिए केवल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना ही जिम्मेदार हैं।”उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जा रहा है और देश में धार्मिक युद्ध भड़काने का जिम्मेदार भी वही है।

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SC दे सकता है राष्ट्रपति को आदेश-पूर्व जज

इस बीच निशिकांत दुबे के बयान पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अशोक कुमार गांगुली की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अशोक कुमार गांगुली ने कहा है कि कानून से ऊपर कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है। संविधान की मूल भावना की रक्षा करना सुप्रीम कोर्ट का काम है, इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ एक्ट को लेकर सरकार के सामने कुछ सवाल रखे हैं। इसके बाद सरकार बैकफुट पर आ गई।”

पूर्व जज ने आगे कहा, “ संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार राष्ट्रपति को संविधान के मुताबिक काम करना चाहिए, अगर ऐसा नहीं होता है तो सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति को निर्देश दे सकता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इससे लोकतंत्र मजबूत होता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को यह समझने की जरूरत है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।”

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