जेएनयू में ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की स्क्रीनिंग के दौरान पत्थरबाजी, कुछ लोग घायल

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December 13, 2024

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डेस्कः दिल्ली के जेएनयू कैंपस में गुरुवार को ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की स्क्रीनिंग के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान पथराव की घटना सामने आई है। फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की स्क्रीनिंग का आयोजन एबीवीपी ने किया था। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि स्क्रीनिंग शुरू होने के 10 मिनट बाद कुछ पत्थर फेंके गए। इसमें कुछ लोग मामूली घायल हो गए। एबीवीपी कथित पत्थरबाजी की निंदा की है।

एबीवीपी-जेएनयू की सचिव शिखा स्वराज ने कहा कि स्क्रीनिंग शुरू होने के 10 मिनट बाद कुछ पत्थर फेंके गए। साबरमती हॉस्टल की छत से या गैलरी से कुछ गिट्टी पत्थर फेंके गए। हमें इसके बारे में निश्चित नहीं है। पहले तो हमने इसे नजरअंदाज कर दिया, लेकिन यह जारी रहा। इस घटना में कुछ लोगों को हल्की चोट लगी। पीछे वाले लोग बच गए। कुछ अज्ञात बदमाशों ने ऐसा किया। यह बेहद निंदनीय है।

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पत्थरबाजी की घटना की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), जेएनयू बयान जारी कर निंदा की है। एबीवीपी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वह साबरमती ढाबा, जेएनयू में ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की स्क्रीनिंग के दौरान हुए कायरतापूर्ण और निंदनीय हमले की कड़ी निंदा करता है। अज्ञात बदमाशों द्वारा शांतिपूर्ण दर्शकों पर पथराव किया गया। इस घटना से सैकड़ों छात्रों और मौजूद लोगों की जान जोखिम में पड़ी। यह बर्बर कृत्य केवल हमला नहीं वरन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।

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वामपंथी संगठन के लोगों पर आरोप

ABVP-JNU के अध्यक्ष राजेश्वर कांत दुबे ने कहा- हमने कैंपस के साबरमती ढाबा पर शाम पांच बजे ‘द साबरमती रिपोर्ट’ फिल्म की स्क्रीनिंग का आयोजन किया था। इसमें गोधरा की उस घटना को दिखाया गया है, जिसमें 59 कारसेवकों को जिंदा जला दिया गया था। हमने पहले भी ऐसी फिल्में दिखाई हैं। सुबह से ही फिल्म की स्क्रीनिंग को रोके जाने को लेकर माहौल बनाया जा रहा था। ऐसा करने वाले वामपंथी संगठन के लोग थे।

अंधेरे की आड़ लेकर फेंके पत्थर

राजेश्वर कांत दुबे ने आगे कहा- वामपंथी संगठन से जुड़े लोग स्क्रीनिंग के खिलाफ पर्चे और व्हट्सऐप के जरिए माहौल बना रहे थे। शाम को पांच बजे हजारों की संख्या में फिल्म देखने के लिए जमा हुए। ऐसे में जब वामपंथी संगठन से जुड़े लोगों को लगने लगा कि सामने से विरोध करना संभव नहीं होगा तो उन्होंने दूसरा रास्ता अपनाया। इन लोगों ने अंधेरे की आड़ लेकर कुछ पत्थर फेंके जिनसे फिल्म देखने बैठे कुछ छात्रों को चोटें आईं।

नहीं होनी चाहिए हिंसा- टीएस सिंहदेव

फिल्म की स्कीनिंग के दौरान हुई हिंसा की घटना पर कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने कहा कि हिंसा तो नहीं होनी चाहिए। सभी को अपनी राय व्यक्त करनी चाहिए। यह एक प्रायोजित और प्रेरित फिल्म है, निष्पक्ष नहीं लेकिन फिल्म की स्कीनिंग में हिंसा तो नहीं होनी चाहिए। हिंसा की कोई जगह नहीं है।

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पीएम मोदी ने भी देखी थी फिल्म

बता दें कि फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ 15 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी कैबिनेट के सहयोगियों और BJP सांसदों के साथ यह फिल्म संसद के पुस्तकालय भवन स्थित बालयोगी सभागार में देखी थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा प्रमुख जीतन राम मांझी समेत अन्य नेता मौजूद थे।

कई राज्यों में टैक्स फ्री

इसे कई राज्यों (ओडिशा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गुजरात) में टैक्स फ्री किया गया है। धीरज सरना की निर्देशित फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ में विक्रांत मैसी, राशि खन्ना और रिद्धि डोगरा ने मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म के निर्माताओं में शोभा कपूर, एकता आर कपूर, अमूल वी मोहन और अंशुल मोहन शामिल हैं।

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गोधरा कांड की सच्चाई दिखाने का आरोप

फिल्म में 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगने की घटना के पीछे की सच्चाई का खुलासा किए जाने का दावा किया गया है। गोधरा कांड में अयोध्या से लौट रहे 59 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। ये श्रद्धालु एक धार्मिक समारोह में भाग लेने के बाद गुजरात वापस लौट रहे थे।

कई आरोपी ठहराए गए थे दोषी

गोधरा कांड के समय नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखा गया था। नतीजतन सांप्रदायिक दंगे हुए थे। गुजरात पुलिस ने गोधरा कांड की जांच के बाद ट्रेन के डिब्बों को आग के हवाले करने के लिए मुस्लिम भीड़ को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में अदालतों से कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।

रेल मंत्री लालू का जांच आयोग खारिज

इस घटना को लेकर सियासी माहौल भी गरमा गया था। कांग्रेस के सहयोगी और तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की ओर से गठित जांच आयोग ने दावा किया था कि यह आग्निकांड एक दुर्घटना थी। बाद में गुजरात हाईकोर्ट ने जांच आयोग के निष्कर्षों को खारिज करते हुए आयोग को असंवैधानिक करार दिया था।

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