झारखंड में डेंगू और चिकनगुनिया पर अलर्ट, घर-घर जाकर मरीजों को पहचान करने का निर्देश

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Live Dainik

July 29, 2024

dengue

झारखंड में बारिश के बाद डेंगू, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस समेत अन्य बीमारियों के मरीज बढ़ने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इनके बचाव के लिए एडवायजरी जारी की है। इतना ही नहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक आलोक त्रिवेदी ने सभी सिविल सर्जन और जिला सर्विलांस पदाधिकारियों को अलर्ट करते हुए इन बीमारियों की सतत निगरानी करते हुए इससे बचाव व उपचार सुनिश्चित कराने को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिया है।

राज्य में डेंगू चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस के अलावा डायरिया, टाइफायड, जॉन्डिस, हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ए के मरीज भी अस्पतालों में तेजी से बढ़े हैं। इसे देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक आलोक त्रिवेदी ने सभी सिविल सर्जन और जिला सर्विलांस पदाधिकारी से इन बीमारियों से बचाव, रोकथाम के लिए की सतत निगरानी करने को कहा।

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प्रखंड स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम करेगी भ्रमण

अभियान निदेशक ने निर्देश दिया है कि जिला और प्रखंड स्तर पर डिजीज आउटब्रेक की स्थिति में डिस्टिक रैपिड रिस्पांस टीम गठित करें। यह टीम प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण करे। संक्रमित व्यक्ति की जानकारी मिलते ही लाइन लिस्ट तैयार कर इलाज की समुचित व्यवस्था करें। ताकि महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर ससमय नियंत्रण किया जा सके। साथ ही आईडीएसपी के तहत लक्षण आधारित, संभावित और लैब रिपोर्ट के साप्ताहिक आंकड़ों के ट्रेंड के अनुश्रवण का निर्देश दिया गया है। डायरिया व फूड प्वाइजनिंग आदि की सूचना पर संबंधित क्षेत्र में निगरानी टीम भेजकर त्वरित कार्रवाई करने को भी कहा गया है।

घर-घर जाकर मरीजों की पहचान करें सिविल सर्जन

सभी सिविल सर्जनों से कहा गया है कि जिला वीबीडी से समन्वय स्थापित कर एमपीडब्ल्यू ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जेई के संभावित रोगियों की पहचान करेंगे। रोग प्रबंधन के लिए उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाएगा। जिस क्षेत्र में रोगियों की सूचना मिलती है, वहां निगरानी टीम भेजकर एक्टिव केस की खोज के लिए घर-घर जाकर फीवर सर्वे कराएं। फीवर सर्वे के बाद संभावित रोगियों की लाइन लिस्टिंग की जाए। लैब टेस्ट में रोग की पुष्टि होने के बाद सूची बनाकर केस बेस्ड सर्विलांस किया जाए।

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आउटब्रेक की स्थिति में फॉगिंग

सभी सिविल सर्जन जिला वीबीडी से समन्वय स्थापित बना लार्वा डेंसिटी सर्वे की सुक्ष्म कार्ययोजना बनाएं। प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए लार्वानाशी छिड़काव के साथ ही आउटब्रेक की स्थिति में फॉगिंग सुनिश्चित करायी जाए। जिलावार छिड़काव की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सीएचसी स्तर तक पर्यवेक्षण दल बनाकर छिड़काव की निगरानी की जाए। साथ ही जनजागरुकता के लिए बीमारियों के लक्षण व बचाव को लेकर प्रचार प्रसार की हिदायत भी दी है।

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