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बाबा बैद्यनाथ धाम के गुंबद से उतारा गया पंचशूल, शिवरात्रि से पहले दर्शन और स्पर्श को लेकर क्या है मान्यता जानिये

देवघर : बाबा बैद्यनाथ मंदिर के गुंबद पर स्थित पंचशूल को उतारा गया। शिवरात्रि से पहले शिव और पार्वती मंदिर के शिखर पर स्थापित पंचशूल को उतारा गया तो उसके दर्शन और स्पर्श के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
परंपरा के तहत मंदिर के शिखर पर स्थापति पंचशूल को उतारा गया, फिर उसकी पूरे विधि विधान से पूजा की गई। इस दौरान मंदिर में गठबंधन पूजा बंद रही। बाबा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है उसके शिखर पर स्थापित त्रिशूल नहीं, पंचशूल, जिसे मंदिर का सुरक्षा कवच माना जाता है। कहा जाता है कि देश में सिर्फ देवघर मंदिर के शिखर पर ही पंचशूल स्थापित है। बैद्यनाथ धाम में स्थापित पंचशूल रहस्यों से भरा है। इस पंचशूल में पांच तत्व-पृथ्वी, जल, आग, आकाश और वायु है जबकि त्रिशूल में तीन तत्व- वायु, जल और अग्नि है।
12 ज्योतिलिंग में से एक देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम का इतिहास रावण से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि बाबा के मंदिर की शिखर पर स्थापित पंचशूल मनुष्य को अजेय शक्ति प्रदान करता है। बाबा बैद्यनाथ मंदिर में स्थापित पंचशूल को लेकर धर्माचार्यो के बीच अलग अलग मान्यता है, लेकिन सभी एक बात पर सहमत है कि पंचशूल का इतिहास और महत्व त्रेता युग के लंका नरेश रावण से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण रावण द्वारा कराया गया था। रावण ने ही मंदिर की सुरक्षा के लिए शिखर पर पंचशूल का सुरक्षा कवच स्थापित कराया था। यही वजह है कि आजतक किसी भी प्राकृतिक आपदा का असर बाबा बैद्यनाथ मंदिर पर नहीं हुआ है।
कहा तो ये भी जाता है कि रावण ने लंका की सुरक्षा के लिए चारों द्वार पर पंचशूल का सुरक्षा कवच स्थापित किया था। रावण को तो ये पंचशूल भेदना आता था लेकिन भगवान राम इससे अनभिज्ञ थे ।इसके बाद विभीषण ने जब यह बात बताई तभी श्रीराम और उनकी सेना लंका में प्रवेश कर पाई ।पंचशूल के बारे में कहा जाता है कि यह मानव शरीर में मौजूद पांच विकार-काम, क्रोध, लोभ, मोह और ईर्ष्या को नाश करता है,यह पंचतत्व- क्षिति, जल, पावक, गगन और समीर से बने मानव शरीर का पर्याय है।

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