बोकारोः खूंटीडीह गांव की 18 वर्षीय युवती के अपहरण और हत्या मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही और संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। एसपी हरविंदर सिंह ने पिंड्राजोर थाना प्रभारी समेत कुल 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। झारखंड में पहली बार किसी एक थाने में पूरे स्टाफ पर एक साथ कार्रवाई की गई है।
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एसपी की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ केस को हल्के में लिया, बल्कि आरोपी को बचाने की कोशिश भी की। आरोप है कि थाना परिसर में आरोपी के साथ शराब पार्टी, लेन-देन और मामले को दबाने के लिए वरीय अधिकारियों को गुमराह किया गया। कार्रवाई के तहत थाना प्रभारी अभिषेक रंजन, मुंशी अक्षय कुमार, अनुसंधानकर्ता अनिकेत कुमार समेत 10 एसआई, 5 एएसआई, 2 हवलदार व 11 आरक्षियों को संस्पेंड किया गया।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुई जांचः हाईकोर्ट ने मामले की निगरानी करते हुए एक सदस्यीय समिति गठित कर रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में देने का निर्देश दिया। इसके बाद डीआईजी संख्या रानी मेहता ने मौके पर पहुंचकर जांच की। सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में नई एसआईटी गठित की गई। टीम ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल व मानव साक्ष्यों के आधार पर 24 घंटे में केस का खुलासा कर दिया।
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आरोपी गिरफ्तार, जंगल में मिला युवती का कंकालः एसआईटी ने 26 वर्षीय दिनेश महतो को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपराध कबूल किया। उसकी निशानदेही पर मधुटांड जंगल से युवती का कंकाल, कपड़े और हत्या में इस्तेमाल चाकू बरामद किया गया।
मां की लड़ाई से 9 माह बाद खुला मामलाः यह मामला 21 जुलाई 2025 का है, जब खूंटीडीह निवासी रेखा देवी ने बेटी पुष्पा महतो के अपरहण की शिकायत दी थी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 4 अगस्त को केस दर्ज किया गया। जांच महीनों तक ठंडी पड़ी रही। मां ने आखिरकार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया।


