निलंबित IAS विनय चौबे को क्यों मिली जमानत ? जानिए सु्प्रीम कोर्ट ने क्या लगाईं हैं शर्ते ?

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April 13, 2026

रांची: Supreme Court of India ने निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को 2009-10 के कथित जमीन घोटाले और उत्पाद नीति मामले में सशर्त जमानत दे दी है। अदालत ने साफ किया है कि चौबे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।

जस्टिस बीवी नागरथना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामला काफी पुराना (2009-10) है और इसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी है। राज्य सरकार द्वारा दर्ज केस में चौबे समेत अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

2010 के जमीन मामले से जुड़ा विवाद

विनय चौबे की ओर से दलील दी गई कि जब यह मामला सामने आया, तब वे हजारीबाग के उपायुक्त थे। जमीन से जुड़े इस मामले में वे करीब सात महीने से जेल में बंद हैं। वहीं, राज्य सरकार ने बताया कि उनके खिलाफ अन्य मामले भी दर्ज हैं।

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2025 में हुई थी गिरफ्तारी

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 20 मई 2025 को विनय चौबे को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि 2022 की उत्पाद नीति में उन्होंने कथित तौर पर फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर मैनपावर सप्लाई कंपनियों को काम देने की अनुमति दी, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ। गिरफ्तारी के बाद से वे जेल में थे।

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हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत

इससे पहले Jharkhand High Court ने 6 जनवरी 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाईं शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कई शर्तें भी तय की हैं:

  • जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा
  • गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे
  • देश छोड़कर नहीं जाएंगे
  • केस से जुड़े व्यक्तियों से दूरी बनाए रखेंगे
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इन शर्तों के साथ अदालत ने उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।

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