सितम्बर में विकास दर अप्रैल तिमाही से कम रहने का अनुमानः सूर्यकांत शुक्ला

रांचीः आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला का कहना है कि सितंबर तिमाही में विकास दर पहली तिमाही से कम रहने का अनुमान है। 31 मार्च 2024 को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की विकास दर 7 प्रतिशत के आसपास रही है। जीडीपी वृद्धि दर के अधिकारिक आंकड़े 30 नवंबर को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय जारी करेगा। एनएसओ के अधिकारिक आंकड़ों मे वास्तविक सकल घरेलू उत्पादन की वृद्धि दर जो भी, पर यह तय माना जा रहा है कि पहली तिमाही अप्रैल जून 2023 की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत से कम रहेगी।
आर्थिक विशेषज्ञों ने दूसरी तिमाही के लिये विकास दर का अनुमान 6 .8 प्रतिशत से लेकर 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर का लगाया है। जानकारों का यह अनुमान भले ही पहली तिमाही की तुलना में कम है तो भी दुनिया भर की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं मे सबसे तेज वृद्धि दर है।
इस वृद्धि दर में घरेलू उपभोक्ता मांग की सबसे बड़ी देन है। देश की जीडीपी मे उपभोक्ता खपत का योगदान 60 प्रतिशत का है। गौर करने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि देश की जीडीपी मे सबसे ज्यादा योगदान करने वाले घटक उपभोक्ता खपत मे शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में विसंगति है। शहरी क्षेत्र मे मजबूत और ग्रामीण क्षेत्र में कमजोर है। जबकि दो तिहाई आबादी ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है।
सर्विस सेक्टर, निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अच्छे संकेतक मिले हैं,जबकि कृषि और निर्यात इस अवधि मे कमजोर रहा है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही अक्टूबर से मार्च मे देश की विकास दर कैसी रहेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था मे मांग कैसे बढ़ेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वास्तविक मजदूरी मे कितना इजाफा होता है और मंहगाई कितना नरम हो पाती है। तेज वृद्धि दर देश की अर्थव्यवस्था के लिए निश्चित रुप से धीमी वृद्धि दर से ज्यादा फायदेमंद है परंतु भीषण आर्थिक विषमता के रहते विकास का फायदा अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचने के बजाय देश के 10 प्रतिशत लोगों के पॉकेट मे सिमट गया है जिनके पास देश की दौलत का 77 प्रतिशत हिस्सा है।

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