रांचीः शनिवार को गांडेय से जेएमएम विधायक कल्पना सोरेन ने ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता से जुड़े शैक्षणिक एवं संवादात्मक सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे सामान्य कैंसरों में से एक है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएँ इसके लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देती हैं और अक्सर अंतिम चरण में ही इलाज के लिए अस्पताल पहुँचती हैं।यह सिर्फ एक स्वास्थ्य विषय नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम जागरूकता फैलाएँ, समय पर जांच को बढ़ावा दें और महिलाओं को इस लड़ाई में सशक्त बनाएं।
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इस सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कल्पना सोरेन ने कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन अधिकार के नाम पर राजनीति करना और अधूरी तैयारी के साथ मुद्दों को आगे बढ़ाना, यह देश के लोकतंत्र के साथ न्याय नहीं है।महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल पहले ही 2023 में पारित हो चुका है, जिसमें साफ तौर पर जनगणना और परिसीमन के बाद ही इसे लागू करने की बात कही गई थी।फिर आज, जब कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं, बिना तैयारी और बिना प्रक्रिया पूरी किए इस मुद्दे को फिर से उठाना समझ से परे है। क्या यह सच में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए है, या सिर्फ एक राजनीतिक रणनीति?सच्चाई तो यह है कि पक्ष और विपक्ष, दोनों जानते थे कि क्या होने वाला है। लेकिन जब बहुमत नहीं मिला, तो इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना पहले से तय लगता है।वैसे भी महिलाओं का अधिकार कोई चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार प्रक्रिया है, जिसे ईमानदारी, डेटा और स्पष्ट नीयत के साथ लागू किया जाना चाहिए।
महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन अधिकार के नाम पर राजनीति करना और अधूरी तैयारी के साथ मुद्दों को आगे बढ़ाना, यह देश के लोकतंत्र के साथ न्याय नहीं है।
महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल पहले ही 2023 में पारित हो चुका है, जिसमें साफ… pic.twitter.com/FwXoERdSlW
— Kalpana Murmu Soren (@JMMKalpanaSoren) April 18, 2026


