जज के खिलाफ FIR में इतनी देर क्यों? जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में उपराष्ट्रपति धनखड़ बोले- मुझे भी नहीं…

jagdip-dhankhad-on-justice-yaswant-verma

डेस्कः जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर कथित तौर पर बड़ी मात्रा में कैश मिलने के मामले में सवाल उठाते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि ऐसा लगता है मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उन्होंने कहा कि लोगों को इंतजार था कि इस मामले में सच सामने आएगा लेकिन अब तक कोई एफआईआर तक नहीं दर्ज की जा सकी। उन्होंने कहा कि क्या इस तरह के मामले न्यायिक व्यवस्था को प्रदूषित नहीं करते हैं? हमें कम से कम इसका पता तो लगाना चाहिए।

एक पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, दो महीने बीत चुके हैं। इस मामले में तेजी से जांच होनी चाहिए। लेकिन अब तक एफआईआर ही दर्ज नहीं की जा सकी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है जिसमें कहा गया था कि शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होगी।

See also  Live Dainik से बोले नव नियुक्त राज्यपाल संतोष गंगवार- सारे कयास हो जाएंगे गलत, पक्ष-विपक्ष को लेकर चलेंगे साथ

JMM करेगी सरना और आदिवासी धर्म कोड को लेकर आंदोलन, 27 मई को महाधरना

धनखड़ ने मामले की जांच कर रही तीन न्यायाधीशों की आंतरिक समिति द्वारा गवाहों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करने के कदम को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, ‘यह एक गंभीर मुद्दा है। ऐसा कैसे किया जा सकता है?’ वर्ष 1991 का के. वीरास्वामी बनाम भारत संघ मामला उच्चतम न्यायालय द्वारा दिया गया एक अहम निर्णय है, जो उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों को भ्रष्टाचार-रोधी कानूनों के दायरे में लाने से संबंधित है और न्यायिक स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करता है।

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में रेखांकित किया था कि न्यायाधीश वास्तव में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ‘लोक सेवक’ हैं, लेकिन उसने कहा कि किसी न्यायाधीश पर मुकदमा चलाने के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होगी। धनखड़ ने कहा, सच सामने आना जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिकों, फरेंसिक एक्सपर्ट्स को भी प्रयास करना चाहिए ताकि कुछ भी छिपा ना रहे।

See also  कांग्रेस को गजवा-अल-हिंद का पोस्टर दिखा निशिकांत दुबे का सवाल- आपका क्या कनेक्शन?

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद को कांग्रेस कार्यकर्ता ने पहना दी बीजेपी की ‘कमल’ वाली टोपी, बिहार में हुए इस घटना का VIDEO हो रहा है वायरल

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत सिन्हा के घर पर आग लगने के बाद कथित तौर पर पाए जाने वाले बेतहाशा कैश को लेकर 22 मार्च को तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना ने तीन सदस्यों वाली एक आंतरिक कमेटी बनाई थी। कमेटी की रिपोर्ट में भी इन आरोपों को विश्वसनीय बताया गया था। इसके बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया। जस्टिस वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया था।

इसी को लेकर उपराष्ट्रपति ने कहा, हम जमीनी हकीकत से भाग नहीं सकते। किताबों में कुछ भी कहा जाए लेकिन सच यही है कि लुटियन्स दिल्ली में महारे जज के घर पर जले हुए नोट मिले और अब तक कोई एफआईआर भी नहीं दर्ज हुई। उन्होंने कहा कि यह देश कानून से चलता है। लोकतंत्र अभिव्यक्ति, बातचीत और विश्वसनीयता से चलती है। लेकिन अगर कोई सोचता है कि वही सही है जो मैं कहता हूं तो यह अहंकार है।

See also  पहली बार में किसी भोजपुरी स्टार को नहीं मिली जीत, बाद में चमके सितारे, खेसारी और रितेश भी अटके

धनखड़न ने कहा, हम ऐसा तो कुछ नहीं कर सकते जो कि न्यायपालिका के सम्मान को धक्का दे। उन्होंने कहा, लोग और कुछ नहीं जानना चाहते बस सच जानना चाहते हैं। क्योंकि लोगों को न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। मुझे भी उम्मीद है कि पारदर्शिता और न्याय के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। धनखड़ ने कहा कि मार्च की उस रात जो कुछ हुआ उससे पूरे देश को चिंता हुई। आप सोचिए कि इस तरह के और कितने मामले होंगे जिनके बारे में हमें पता ही नहीं है।

12 साल की नाबालिग से बाप करता था बलात्कार, मां के सामने पिता हैवान बनकर बेटी के साथ करता रहा था दरिंदगी

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now