Video: पत्नी का इलाज कराने छतरपुर जिला अस्पताल पहुंचा था बुजुर्ग, डॉक्टर ने घसीटकर बाहर फेंका

छतरपुरः डॉक्टर्स को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है, क्योंकि इंसान अगर किसी बीमारी के चक्कर में फंस जाता है तो डॉक्टर्स ही इलाज करके उन्हें ठीक कर सकते हैं। लेकिन क्या हो अगर कोई डॉक्टर हैवान बन जाए तो? मध्यप्रदेश के छतरपुर से एक मामले सामने आया है, जहां एक डॉक्टर ने एक बुजुर्ग को घसीटते हुए जिला अस्पताल से बाहर फेंक दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

छतरपुर के जिला अस्पताल में मरीजों के साथ डॉक्टरों की दबंगई कम होने का नाम नहीं ले रही है। मरीज हो या कोई बुजुर्ग व्यक्ति, डॉक्टर हर किसी पर अपनी दबंगई दिखा रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे एक डॉक्टर ने 77 वर्षीय बुजुर्ग को घसीटते हुए जिला अस्पताल से बाहर फेंक दिया।

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अस्पातल में मौजूद लोगों ने जब इस घटना का वीडियो बनाया तो डॉक्टर वहां से भाग निकला। लोगों ने मांग की है कि ऐसी दबंगई करने वाले डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बताया जा रहा है कि 77 वर्षीय बुजुर्ग अपनी पत्नी का इलाज कराने पहुंचे थे, तभी उन्हें घसीट-घसीटकर मारा गया।

बुजुर्ग के गाल पर जड़ दिया थप्पड़

बुजुर्ग ने डॉक्टर से लेट आने का कारण पूछ लिया तो इसी बात पर डॉक्टर साहब भड़क गए। बुजुर्ग का आरोप है कि डॉक्टर ने गुस्से में पहले पर्चा फाड़ा और सीधे उनके गाल पर थप्पड़ जड़ दिया। जिसके बाद दोनों में बहस होने लगी। बुजुर्ग इसके पहले कुछ समझ पाता तभी दो लोग उसे अस्पताल से घसीटते हुए बाहर ले जाने लगे।

वे उस बुजुर्ग को गाल पर थप्पड़ मारते हुए बाहर ले गए। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इंडियन नेशनल कांग्रेस ने भी फेसबुक पेज पर यह वीडियो पोस्ट करते हुए बीजेपी और CM मोहन यादव पर सवाल खड़ा किया है।

सिविल सर्जन ने क्या कहा?

बुजुर्ग को घसीटने वाला यह वीडियो गुरुवार का बताया जा रहा है। इस मामले को लेकर सिविल सर्जन जीएल अहिरवार से मीडिया ने बात की तो उन्होंने कहा कि हमने डॉक्टर को समझा दिया है कि बुजुर्ग को सबसे पहले देखना है।

हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है और उनका कहना है कि अगर डॉक्टर बुजुर्ग व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार करता है तो ऐसे लोगों के खिलाफ समझाइश नहीं बल्कि कार्रवाई होनी चाहिए। इससे पहले भी जिला अस्पताल में मरीजों के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आ चुका है।

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