बिहार चुनाव 2025ः चुनाव के दूसरे चरण की 122 में से इन 11 सीटों पर जोरदार फाइट

manish_kashyap_jyoti_singh_bima_bharti

Bihar Election 2025: बिहार चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान आज (मंगलवार) हो रहा है। रविवार शाम चुनाव प्रचार थमने के बाद अब फैसला जनता के हाथ में है। 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जिनमें से 11 सीटें इस चरण का असली सियासी रोमांच बन गई हैं। इन सीटों पर संघर्ष सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा, जातीय गणित, दल-बदल की राजनीतिक समझ और स्थानीय नेतृत्व की साख से भी जुड़ा है।

चंपारण, सीमांचल, मगध और शाहाबाद की ये अहम सीटें सत्ता की दिशा बदलने की ताकत रखती हैं। कई हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार मैदान में हैं, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की बहू, भोजपुरी स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह और यूट्यूबर मनीष कश्यप के कारण मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

फिदायीन हमला हो सकता है दिल्ली धमाका, i20 के फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़ रहे तार

ये हैं वो 11 हॉट सीटें, जहां भिड़ंत सबसे दिलचस्प

इमामगंज
इमामगंज विधासभा सीट पर केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की बहू दीपा कुमारी एनडीए की तरफ से चुनावी मैदान में है। इस सीट पर उनका मुकाबला आरजेडी की रितु प्रिया चौधरी, और जन सुराज के डॉ. अजीत कुमार के बीच मुकाबला है।

काराकाट
बिहार की चर्चित काराकाट विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है। इस सीट को लंबे समय से वामपंथ का गढ़ कहा जाता रहा है, लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं। इस बार जेडीयू के महाबली सिंह, सीपीआई (माले) के अरुण सिंह, जन सुराज पार्टी के योगेंद्र सिंह, और भोजपुरी स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह बतौर निर्दलीय मैदान में हैं।

चनपटिया
चनपटिया में यूट्यूबर मनीष कश्यप इस बार चुनावी मैदान में है। इस बार के विधानसभा चुनाव में वह जन सुराज के टिकट से सियासी ताल ठोक रहे हैं। वहीं इस बार उनके खिलाफ बीजेपी के उमाकांत सिंह और कांग्रेस अभिषेक रंजन भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। गौरतलब है कि यूट्यूबर मनीष कश्यप पहले बीजेपी में थे, मगर उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोरी की पार्टी जन सुराज का दामन थाम लिया था।

बिहार में लास्ट फेज की वोटिंग जारी, झारखंड के घाटशिला समेत 6 राज्यों के 8 सीटों पर हो रहा हैं मतदान

गोविंदगंज
गोविंदगंज सीट पर इस बार कांग्रेस से शशि भूषण उर्फ गप्पू राय, चिराग पासवान की पार्टी से राजू तिवारी और जन सुराज के टिकट से कमलेश कांत गिरी मैदान में हैं। 2025 में यहां मुकाबला सीधे राजनीतिक प्रतिष्ठा का हो गया है। कांग्रेस ने अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए आक्रामक प्रचार किया, तो एनडीए इसे पूर्वी चंपारण की सबसे सुरक्षित सीट बनाने के मूड में है। ब्राह्मण, वैश्य और पिछड़ा वर्ग यहां निर्णायक भूमिका में हैं। 2020 में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की थी, इस बार कांग्रेस पुरानी पकड़ दोबारा साबित करना चाह रही है।

जोकीहाट
इस सीट पर जेडीयू से जनाब मंजर आलम, आरजेडी से शाहनवाज आलम, जन सुराज से सरफराज आलम, और AIMIM से मुर्शीद आलम मैदान में हैं। इस सीट पर राजद और AIMIM के बीच मुस्लिम वोट बैंक की सबसे तीखी लड़ाई। यहां का चुनावी माहौल पूरी तरह सामुदायिक रणनीति पर टिका है। 2020 के बाद AIMIM के प्रभाव ने मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई थी, जिसे राजद अब किसी भी हालत में वापस पाना चाहती है।

रूपौली
रूपौली सीट पर जेडीयू के कलाधर मंडल, आजेडी की बीमा भारती और जन सुराज से आमोद कुमार मैदान में है। बीमा भारती के जेडीयू छोड़ आरजेडी में आने से यहां की राजनीति में भूचाल आया है। जेडीयू से अलग होकर आरजेडी में जाने के फैसले ने समीकरण बदल दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में बीमा भारती की व्यक्तिगत पकड़ मजबूत है, पर जेडीयू संगठन इसे विश्वासघात बताकर मतदाताओं को साधने में जुटा है।

लाल किले के पास हुए कार धमाके में मृतकों की संख्या 11 पहुंची, गृहमंत्री घायलों से मिले, कार मालिक सलमान पुलिस हिरासत में

धमदाहाधमदाहा बिहार सरकार में मंत्री और जेडीयू उम्मीदवार लेसी सिंह का गढ़ है। जेडीयू इसे सबसे सुरक्षित सीट मानती रही है। महागठबंधन इस किले में सेंध लगाने के मिशन में जुटा है। धमदाहा में हर चुनाव लेसी सिंह के सामने उनके पुराने साथी और आरजेडी के उम्मीदवार संतोष कुशवाहा हैं। महिला समर्थन, सरकारी योजनाओं की पहुंच और स्थानीय नेटवर्क इनकी सबसे बड़ी ताकत है। इस बार आरजेडी ने जातीय संतुलन और असंतुष्ट वोटरों पर फोकस करते हुए जोर लगाए रखा है।

कड़वा
यह सीट पर मुस्लिम-यादव समीकरण की पहचान वाली है, मगर यहां कांग्रेस का प्रभाव पुराना है। AIMIM और छोटे मुस्लिम दलों की दावेदारी से कड़ी टक्कर बन चुकी है। सीमांचल में कांग्रेस की पारंपरिक मुस्लिम पकड़ वाली यह सीट अब पहले जैसी सुरक्षित नहीं रह गई। AIMIM और नए मुस्लिम चेहरों के उभार से मुकाबला त्रिकोणीय होकर अनिश्चित बन गया है। 2025 में यह सीट तय करेगी कि सीमांचल में कांग्रेस टिकेगी या जमीन खिसकेगी।

कहलगांव
कहलगांव सीट राजद और कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान के लिए जानी जाती है। इस सीट पर हर चुनाव में महागठबंधन की एकता की परीक्षा होती है। कहलगांव में मुकाबला सिर्फ एनडीए बनाम महागठबंधन नहीं, बल्कि महागठबंधन के भीतर वर्चस्व की जंग भी है। टिकट बंटवारे से लेकर वोट ट्रांसफर तक सब कुछ चुनौतीपूर्ण रहा है। बीजेपी इस सीट पर चुपचाप रणनीति के जरिए घुसपैठ बनाने में लगी है।

रामगढ़
रामगढ़ सीट पर राजद के कद्दावर यादव नेता सुधाकर सिंह की साख यहां दांव पर है। यह सीट व्यक्तिगत नेतृत्व बनाम संगठन की ताकत का टेस्ट बन गई है। सुधाकर सिंह अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं और ग्रामीण इलाकों में इनकी पकड़ मजबूत है। मगर पार्टी लाइन से अलग बयानबाज़ी कभी-कभी खुद राजद के लिए परेशानी बन जाती है। बीजेपी-जेडीयू गठबंधन इस सीट को यादव बेल्ट में सेंध का मौका मानकर लड़ रहा है।

चकाई
चकाई सीट 2020 में निर्दलीय सुमित सिंह की अप्रत्याशित जीत ने सबको चौंकाया था। अब जेडीयू गठबंधन के साथ मिलकर अपनी लोकप्रियता दोहराने की चुनौती है। चकाई में व्यक्तिगत ब्रांड बनाम दल का ब्रांड की लड़ाई है। सुमित सिंह ने विकास और व्यक्तिगत संपर्क के दम पर सीट जीती थी, पर अब गठबंधन के साथ आने के फायदे-नुकसान दोनों सामने हैं।

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार का दिल्ली दौरा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाकात

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now