रांचीः प्रधान महालेखाकार इंदू अग्रवाल ने राज्य में बालू खनन के लिए आवंटन और प्रबंधन की गड़बड़ी के बारे में खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2017 में झारखंड राज्य बालू खनन नीति लागू की गई थी।इसके तहत झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) को व्यवसायिक बालू घाटों के नीलामी का जिम्मा सौंपा गया। राज्य में कुल 608 बालू घाटों की सूची तैयार की गई। इसमें जेएसएमडीसी ने 389 बालू घाटों की परिचालन की प्रक्रिया शुरू की।इसमें केवल 21 घाटों का ही संचालन किया जा सका। माइनिंग प्लान और पर्यावरणीय स्वीकृति में देरी के कारण 9,782 एकड़ क्षेत्र के 368 घाट वर्षों तक बंद पड़े रहे। इस निष्क्रियता के कारण सरकार को 70.92 करोड़ के संभावित राजस्व नुकसान हुआ।
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इसके अलावा 2019–22 के दौरान बालू से संबंधित स्वामित्व राशि में 82 लाख से 7.61 करोड़ तक की विसंगतियां भी पाई गईं। जिला सर्वे रिपोर्ट (वर्ष 2017-22) के अनुसार पाकुड़, धनबाद और सिमडेगा के 14 बालू घाटों में कभी खनन नहीं हुआ। इसका क्षेत्रफल 129 हेक्टेयर जो बढ़कर 172 हेक्टेयर हो गया। लेकिन बालू का भंडारण 51 लाख टन से घटकर 14 लाख टन हो गया। ऐसे में अवैध खनन से इन्कार नहीं किया जा सकता है। इतनी बड़ी मात्रा में बालू का बहाव नहीं हो सकता है।जेएसएमडीसी को जब बालू घाट के परिचालन का जिम्मा दिया गया था तो उन्हें बालू ढ़ोने वाले वाहनों में जीपीएस, सीसीटीवी कैमरा, स्टाक यार्ड के साथ एक आइटी कंपनी को मदद लेनी चाहिए थी। ऐसा नहीं किया गया।
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कम खनन दिखाने से 292.75 करोड़ का नुकसान
महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पत्थर के खनन में 93.53 लाख घन मीटर कम रिपोर्टिंग के कारण राज्य को 292.75 करोड़ का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट कहा गया है कि खनन पट्टा आवंटन की जांच की तो पता चला कि खनन के लिए नौ आवेदन को उसी दिन या एक दिन बाद ही कंपनी को आवंटन जारी कर दिया गया।खनन आवंटन के लिए दिए गए आवेदन में कई गलत जानकारी भी दी गई थी। कई जगहों पर लीज क्षेत्र को ओवरलैप किया गया था। ग्राउंड लेबल वाटर के स्तर की भी गलत जानकारी दी गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2009 और 2022 के दौरान स्वीकृत किए गए पट्टा के 74 मामलों में 64 की स्थल निरीक्षण में आवेदकों की ओर निर्धारित दस्तावेज भी नहीं दिए गए थे।120 खनन योजना में 65 खनन योजना गैर नामित पदाधिकारियों ने अनुमोदित किया था। खनन क्षेत्र में कुछ भाग में खनन नहीं करना होता है, लेकिन 25 में से 14 मामले में 83.87 लाख टन गैर खनन संसाधनों से जुटाया गया। जबकि खनन के लिए 53.21 लाख टन ही निर्धारित किया गया। जिसके चलते 34.96 करोड़ का अवैध खनन हुआ है। इसके अलावा 22 में से 14 मामले में पट्टाधारियों ने खनन क्षेत्र से बाहर जाकर 15.14 हेक्टेयर में खनन किया है।इसके लिए धनबाद, पाकड़, साहिबगंज, पलामू, चतरा, पश्चिमी सिंहभूम में टीम ने जांच किया है। 63 मामलों में से 46 मामलों में खनन क्षेत्र की सीमा की जानकारी नहीं थी।जबकि 30 मामलों में सीमा के बारे में जानकारी ही नहीं थी। 63 पट्टों में से 61 में 74676 पौधे लगाए जाने थे। लेकिन सिर्फ 2225 पौधे लगाए गए थे।


