JPSC की परीक्षा में अशुद्धियों की भरमार, हर सवाल में 3-4 गलतियां, सर्वोच्च न्यायालय से लेकर शहीद के नाम भी सही नहीं लिखा गया

JPSC की परीक्षा में अशुद्धियों की भरमार, हर सवाल में 3-4 गलतियां, सर्वोच्च न्यायालय से लेकर शहीद के नाम भी सही नहीं लिखा गया

रांचीः जेपीएससी जैसे अहम संस्थान की हिंदी कमजोर हो गयी है। झारखंड लोक सेवा आयोग(JPSC) की सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा गलतियों की वजह से चर्चा में है। 4 अप्रैल से शुरू परीक्षा 12 अप्रैल तक चलेगी। अभ्यर्थी प्रश्न पत्र पढ़ने के बाद परेशान हो रहे है। सोमवार को सामान्य अध्ययन के दूसरे पेपर में अशुद्धियों की सारी हदें पार कर दी गई। इसके हर पेपर के प्रश्न पत्र में 100 से अधिक अशुद्धियाँ है।प्रश्न पत्र में सर्वोच्च न्यायलय जैसे संवैधानिक शब्दों से लेकर झारखंड के महापुरुषों तक के नाम गलत छापे गए।

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अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्नपत्र में दर्जनों गलतियां है, जिससे वाक्यों के अर्थ ही बदल गए हैं। स्थिति यह है कि लगभग हर सवाल में 3 से 4 अशुद्धियां हैं। इस परीक्षा के जरिए सहायक वन संरक्षक के 78 पदों पर नियुक्ति होनी है, लेकिन आयोग की इस गंभीर लापरवाही ने चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिये है। छह अप्रैल 2026 को प्रथम पाली में आयोजित जेनरल स्टडीज प्रथम पत्र व द्वितीय पाली में आयोजित जेनरल स्टडीज द्वितीय पत्र के प्रश्न पत्र में अंग्रेजी और हिंदी में प्रश्न पूछे गये हैं। प्रश्न-पत्र में अंग्रेजी के शब्दों के साथ-साथ हिंदी शब्दों में गलतियों की भरमार है। कहीं-कहीं वाक्य में भी गलतियां है।

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200 अंकों के इस पत्र में खंड एक में सिद्धू-कान्हू को सिडो-कान्हू लिखा गया है। इसी प्रकार ऐतिहासिक को इतिहासिक लिखा गया है, जबकि गठन को गढन व मुख्य को उखय तथा कारणों को कारणे लिखा है। वहीं जन आंदोलन को प्रश्न पत्र में आएंलनों लिखा गया है। एक प्रश्न में मिशनरियों की जगह मिशनीयों व गतिविधियों की जगह गतिदिधियों, प्रश्न की जगह प्रशन व शैक्षणिक की जगह शांसिक लिखा हुआ है।
आंदोलन को आंदोलना और सांस्कृतिक को सांस्क्रृतिक लिखा गया है। सर्वोच्च न्यायालय को सर्वोच न्यायातक, महत्वपूर्ण को महत्वपूर्न लिखा गया है। पुस्तक को पुस्तख व आदिवासी त्योहार की जगह त्योदार लिखा हुआ है। संक्षेप की जगह संक्षेम और संरक्षण की जगह संरक्षाण लिखा है। इतना ही नहीं टिप्पणी की जगह रिप्पणी लिखा हुआ है। जबकि समुदाय की जगह समुनाथ, विषय की जगह विएस, प्रमाणों की जगह प्रमाणें, बुद्धिमता की जगह निद्धमता, वैश्विक की जगह वैशिक, चर्चा की जगह चर्च लिखा हुआ है। सिद्धांत की जगह सिहधांत, समझाइए की समजाइए, हम की जगह टम, निर्माण की जगह निर्मान लिखा हुआ है। वाष्पीकरण की जगह वाष्पीकारक लिखा है, कठोर की जगह कढोर व दैनिक की जगह दैनिस, कठोर को कहीं कगैर भी लिखा हुआ है। घटनाओं की जगह घरनाओं लिख दिया गया है। संघीय की जगह संछीय, मौलिक की जगह मौविक लिख दिया गया है। इसके अलावा भी प्रश्न पत्र में कई गलतियां है।

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जेपीएससी की परीक्षाओं में विवाद और गलतियां पुरानी परंपरा रही हैं, लेकिन संवैधानिक शब्दों और महापुरुषों के नाम में ऐसी लापरवाही पहली बार दिखी है। यह सिर्फ टाइपिंग की चूक नहीं है, बल्कि राज्य के गौरवशाली इतिहास और जन-संवेदनाओं के प्रति जेपीएससी की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है। अगर विषय विशेषज्ञों ने पेपर को एक बार पढ़ा होता, तो इतनी बड़ी चूक नहीं होती। विशेषज्ञों की लापरवाही का खामियाजा अब उन अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है जो सालों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। अधिकारी बनाने वाले आयोग का हाल देखकर झारखंड में शिक्षा का स्तर समझा जा सकता है।

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