राँची:झारखंड हाई कोर्ट ने झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (JUT) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) पर छात्रों को “फंसाने” के गंभीर आरोपों के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति राजेश कुमार की खंडपीठ ने इस मामले में भ्रष्टाचार के संकेत जताए हैं।
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मामले की पृष्ठभूमि
धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि AICTE ने संस्थान को 30 अप्रैल 2025 को 2025-26 के शैक्षणिक सत्र के लिए मान्यता दी, लेकिन JUT ने छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया, जिससे उनके भविष्य को खतरा पैदा हो गया।
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ
· कोर्ट ने कहा कि “ट्रैफिक पुलिस की तरह ही JUT ने छात्रों को फंसाने की कोशिश की है।”
· न्यायमूर्ति कुमार ने इसे “गंभीर मामला” बताते हुए कहा कि राज्य के अधिकारी छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।
· कोर्ट ने इसे “भ्रष्टाचार” की प्रवृत्ति माना है।
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कोर्ट के आदेश
1. CBI जांच – कोर्ट ने CBI को यह जांच करने का निर्देश दिया की:
· AICTE और JUT ने छात्रों को कैसे “फंसाया”?
· छात्रों को फंसाने में किसने क्या भूमिका निभाई?
2. रिपोर्ट – CBI को दो सप्ताह के भीतर सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
3. नए पक्षकार – भारत सरकार (CBI निदेशक) को प्रतिवादी संख्या 4 के रूप में मामले में शामिल किया गया है।
4. सहयोग – JUT और AICTE को CBI जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
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अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें CBI की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। इस आदेश के साथ ही कोर्ट ने याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए दायर आवेदन (I.A. No.303/2026) को निपटा हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।




