भुवनेश्वर के KIIT में दो नेपाली छात्रों के सुसाइड से हड़कंप; UGC ने गठित की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी

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May 2, 2025

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भुवनेश्वर: ओड़िशा के भुवनेश्वर में कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) में नब्बे दिनों के अंदर दो छात्रों की सुसाइड के मामले ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है । नेपाल ने इसकी जांच की मांग की है जबकि UGC ने  जांच के लिए गठित की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी। 

UGC ने बनाई कमेटी

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT), भुवनेश्वर में हुई दो आत्महत्या की घटनाओं के बाद एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। ये घटनाएं क्रमशः 16 फरवरी और 1 मई 2025 को सामने आई थीं।

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KIIT में नेपाली छात्रा ने दी जान

ओडिशा के जाने-माने  KIIT यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस बीटेक की पहली वर्ष की एक छात्रा का शव विश्वविद्यालय के गर्ल्स हॉस्टल में छत के पंखे से लटका मिला। मृतक छात्रा नेपाल के बीरगंज की रहने वाली थी, जो राजधानी काठमांडू से करीब 135 किलोमीटर दूर स्थित है।

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कमरे में मिला नेपाली छात्रा का शव

पुलिस के अनुसार, सोमवार शाम लगभग 8 बजे विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस को इस घटना की सूचना दी गई, जिसके बाद फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। भुवनेश्वर-कटक पुलिस कमिश्नर सुरेश देव दत्ता सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, लेकिन वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

जांच के लिए बनी कमेटी

तीन महीने के अंदर इस तरह की दूसरी घटना होने के बाद UGC के मुतायिक यह समिति इन आत्महत्या मामलों के पीछे के कारणों की जांच करेगी, साथ ही छात्रों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े दिशा-निर्देशों के पालन की स्थिति की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव भी प्रस्तुत करेगी।

समिति के सदस्य हैं 

  1. प्रो. नागेश्वर राव, पूर्व कुलपति, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) – अध्यक्ष

  2. प्रो. शशिकला वानजारी, कुलपति, राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (NIEPA) – सदस्य

  3. प्रो. एच.सी.एस. राठौर, पूर्व कुलपति, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार – सदस्य

  4. डॉ. सुनीता सिवाच, संयुक्त सचिव, UGC – समन्वय अधिकारी

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समिति का कार्यक्षेत्र (TOR):

  • आत्महत्या मामलों से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करना, जिसमें संस्थागत नीतियाँ, शैक्षणिक दबाव, शिकायत निवारण प्रणाली, और समर्थन प्रणाली शामिल होंगी।

  • विश्वविद्यालय की मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली की समीक्षा।

  • छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन का मूल्यांकन।

  • छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से संवाद कर चुनौतियों को समझना।

  • ‘गाइडलाइंस फॉर प्रमोशन ऑफ फिजिकल फिटनेस, स्पोर्ट्स, स्टूडेंट्स हेल्थ’ जैसे दिशानिर्देशों के अनुपालन की जांच।

  • 10 दिनों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करना।

UGC सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में कहा गया है कि समिति अपनी रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर प्रस्तुत करेगी, ताकि छात्रों की सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत किया जा सके।

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