भारत का संविधान अब संताली भाषा में भी, राष्ट्रपति द्रौपर्दी मुर्मू ने किया जारी

भारत का संविधान अब संताली भाषा में भी, राष्ट्रपति द्रौपर्दी मुर्मू ने किया जारी

डेस्कः राष्ट्रपति द्रौपर्दी मुर्मू ने गुरुवार को एक समारोह में संताली भाषा में भारत का संविधान जारी किया। यह समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया था। राष्ट्रपति ने संबोधन में कहा कि यह सभी संताली लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि भारत का संविधान अब संताली भाषा में और ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है।

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राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इससे संताली भाषा में पढ़ व समझ सकेंगे। राष्ट्रपति ने संविधान के शताब्दी वर्ष में इसे ओल चिकी लिपि में उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय काननू और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और उनकी टीम की सराहना की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन व मेघवाल सहित अन्य लोग शामिल थे। इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने इस पहल के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को धन्यवाद दिया, जिनके मार्गदर्शन में यह काम किया गया। उन्होंने कहा कि इस महान पहल से संथाली बोलने वाले लोग अपनी भाषा में संविधान को पढ़ और समझ पाएंगे।”

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साल 2003 में आठवीं अनुसूची में संताली की गयी थी शामिलः संताली भाषा को 2003 के 92वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। यह भारत की प्राचीन भाषाओं में से एक है, जो झारखंड, ओडिशा, परिश्चम बंगाल व बिहार सहित अन्य राज्यों में रहने वाले संताल आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है।

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