सूरजभान सिंह RJD में शामिल होंगे; Ex MP पत्नी-भाई के साथ लालू-तेजस्वी से आज मिलेंगे

Surajbhan_Singh

बिहारः मोकामा के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह अपनी पूर्व सांसद पत्नी वीणा देवी और पूर्व सांसद भाई चंदन सिंह के साथ शनिवार को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में शामिल हो रहे हैं। तेजस्वी यादव राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) के संसदीय बोर्ड अध्यक्ष सूरजभान सिंह के परिवार को कल सदस्यता देंगे।

मोकामा सीट से अनंत सिंह के खिलाफ सूरजभान सिंह के परिवार से किसी के चुनाव लड़ने की चर्चा है। सूरजभान जेल में रहकर 2000 में अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह को बहुत बड़े मार्जिन से हराकर मोकामा से निर्दलीय विधायक बने थे। तब दिलीप सिंह 10 साल से उस सीट को जीत रहे थे और राजद सरकार में कद्दावर मंत्री थे।

आरजेडी के दायरा को मुस्लिम-यादव यानी माय समीकरण से बढ़ाने को परेशान तेजस्वी यादव ने लोकसभा चुनाव में कुशवाहा वोट में काफी सेंधमारी की थी, जिस कारण शाहाबाद और मगध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ज्यादातर सीटें हार गई थी। तेजस्वी तब से राजद को ए टू जेड की पार्टी बता रहे हैं।

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विधानसभा में कई भूमिहार नेताओं को टिकट मिलने की संभावना है। रालोजपा नेता सूरजभान जहां राजद में शामिल हो रहे हैं, वहीं पारस भी महागठबंधन में कुछ सीट लेने की जुगत में जुटे हैं। साल 2000 में मोकामा से निर्दलीय विधायक बने सूरजभान बाद में रामविलास पासवान के साथ हो गए और एक समय लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के ताकतवर नेता थे।

2004 में बेगूसराय जिले की बलिया लोकसभा सीट से लोजपा के टिकट पर सूरजभान सांसद बने। सजायाफ्ता होने के बाद जब खुद नहीं लड़ सके तो 2014 में पत्नी वीणा देवी को लोजपा के टिकट पर मुंगेर सीट से लड़ाया और सांसद बनाया। 2019 में उनके भाई चंदन सिंह नवादा लोकसभा सीट से लोजपा के टिकट पर सांसद बने। इस तरह उनके परिवार में कुल तीन पूर्व सांसद हैं।

रामविलास पासवान के निधन के बाद जब पारस ने पार्टी तोड़ी तो सूरजभान और चंदन ने चिराग पासवान का साथ नहीं दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा ने पारस को किनारे लगा दिया तो पारस के साथ सूरजभान परिवार पर भी राजनीतिक संकट छा गया। सूरजभान सिंह के सामने रालोजपा में रहकर घर बैठने या राजद के साथ जाकर मैदान में बने रहने का विकल्प था। सूरजभान ने तेजस्वी को चुना और कल से वो राजद की राजनीति करेंगे, जिसके शासनकाल को बाहुबलियों की समानांतर सरकार के कारण ‘जंगलराज’ का तमगा मिला था।

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