रांचीः जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी में धांधली की परतें लगातार खुल रही हैं। सीआईडी की चार्जशीट से चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। चार्जशीट के मुताबिक पीटी का रिजल्ट आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही लीक हो गया था। जेपीएससी की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने यह रिजल्ट परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के कर्मचारी उस्मान को वॉट्सएप पर भेज दिया था। इसमें 267 अभ्यर्थियों की सूची थी, जिनमें बिहार के 146, उत्तर प्रदेश के 82 और हरियाणा के 14 सफल अभ्यर्थियों के नाम थे।
सीआईडी की 97 पन्नों की चार्जशीट में 14 पन्ने केवल 82 प्रकार की जब्ती सूची (सीजर लिस्ट) से भरे हैं। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा मामला परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज, ओएमआर शीट और अधिकारियों व सिंडिकेट के बीच हुए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के तकनीकी विश्लेषण पर आधारित है। सीआईडी ने कहा है कि रिजल्ट लीक करने और ओएमआर में हेराफेरी करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों और बिचौलियों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

स्ट्रॉन्ग रूम से मिली बिना सील ओएमआर शीट…सीआईडी के मुताबिक जेपीएससी के स्ट्रॉन्ग रूम में 14वीं सिविल सेवा पीटी की बिना सील ओएमआर शीट और उसका वीडियो फुटेज मिला है। वहीं टीडीपीएल के लालपुर स्थित अवैध दफ्तर से सर्वर और हार्ड डिस्क बरामद हुआ है। डिजिटल साक्ष्य नष्ट करने के भी सबूत मिले हैं। तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते का आईफोन आई-डेस्टिनी स्टोर में फॉर्मेट कराया गया और उनके घर से डेल का एक टूटा लैपटॉप भी मिला।
जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एफएसएल जांच के लिए भेजे गए…जांच एजेंसी के मुताबिक रैकेट के मुख्य सूत्रधार अभय कुमार तिवारी के पास से 5.50 लाख रुपए, लैपटॉप व मोटोरोला का फोन मिला है। उसके द्वारा संचालित प्रकाश रेसिडेंसी और सागर पैलेस के आईडीएफसी बैंक खातों की केवाईसी व वित्तीय लेनदेन भी सामने आए हैं। सह अभियुक्त धर्मेंद्र कुमार को बुलेट बाइक खरीदने के लिए दी गई रकम, टीडीपीएल कर्मियों के एयर टिकट और अधिकारियों के परिजनों की यात्राओं के भुगतान को भी चार्जशीट का हिस्सा बनाए गए हैं। जब्त उपकरणों को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है।
ख्यांगते के अध्यक्ष बनते ही शुरू हो गई थी मनमानी…चार्जशीट के मुताबिक ख्यांगते ने अध्यक्ष का पदभार संभालते ही नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया था। इसमें उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और गोपनीय शाखा के कर्मचारी सोनू कुमार मुख्य सहयोगी की भूमिका में थे। तत्कालीन सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रज कुमार राम ने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी बिंसिस को काम दिलाने के लिए ख्यांगते के मिजोरम स्थित घर पर 2.50 लाख रुपए पहुंचाए थे।
ख्यांगते व श्वेता के बीच 304 बार हुई थी बातचीत
सीआईडी द्वारा विशेष अदालत में पेश किए गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड में श्वेता गुप्ता और अन्य आरोपियों के बीच बातचीत का विस्तृत ब्योरा भी सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक यह बातचीत सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से परे संगठित तालमेल की ओर इशारा करती है। इस रिकॉर्ड के मुताबिक 7 जून 2025 से 15 जुलाई 2026 के बीच श्वेता गुप्ता और एल ख्यांगते के बीच 304 बार बातचीत हुई। वहीं श्वेता की टीडीपीएल के स्कैनिंग प्रभारी प्रदीप कुमार से 19 मार्च 2026 से 14 जुलाई 2026 के दौरान 74 बार बातचीत हुई। टीडीपीएल के कर्मचारी हेमंत वर्मा के साथ भी 16 जनवरी 2026 से 20 जुलाई 2026 के बीच 44 बार बातचीत की पुष्टि हुई है।







