पटनाः गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने 10वीं बार शपथ लिया। नीतीश कैबिनेट में 26 लोग शामिल हुए जिसमें एक नाम ने सबको हैरान कर दिया। बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य हुए बिना नीतीश कुमार की सरकार में दीपक प्रकाश ने मंत्री पद की शपथ ली। दीपक प्रकाश राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे है।
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उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के उनकी पत्नी स्नेहलता का नाम मंत्री पद के लिए फाइनल माना जा रहा था। जीतन राम मांझी के तर्ज पर ये तय था कि नीतीश कुमार की सरकार में कुशवाहा के परिवार से ही कोई सदस्य शामिल होगा। लेकिन जब गुरुवार को अचानक दीपक प्रकाश का नाम आया था सब हैरान हो गए क्योंकि दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधानपरिषद के ही सदस्य है। ऐसा क्या हो गया कि कुशवाहा ने अंतिम समय में बड़ी चाल चल दी।
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उपेंद्र कुशवाहा वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य है और उनकी पत्नी स्नेलता विधानसभा का चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनीं है। उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति में आये इस बदलाव को लेकर एक नाम बहुत चर्चा में है और वो हैं उनकी बहू साश्री मिश्रा कुशवाहा की। सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चा तेज है कि साश्री मिश्रा की राजनीति ने वो कमाल कर दिया जो कुशवाहा खुद अब तक नहीं कर पाएं थे। राजनीतिक मोल भाव में जीतन राम मांझी या चिराग पासवान से कम आंके जाने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने इस बार ऐसा कर दिया जिसने बता दिया कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा और राजनीतिक चाल में वो भी कम बड़े खिलाड़ी नहीं है।
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उपेंद्र कुशवाहा की बहू साक्षी मिश्रा कुशवाहा जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने पिछले दो सालों में राजनीतिक रूप से इतनी मेहनत और सुझबूझ दिखाई जो बड़े बड़े राजनीतिक के जानकार नहीं कर पाते। 2024 के लोकसभा चुनाव में साक्षी मिश्रा कुशवाहा ने अपने ससुर उपेंद्र कुशवाहा के चुनाव प्रचार खुद को झोंक दिया। काराकाट लोकसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की एंट्री ने उनकी अरमानों पर पानी फेर दिया। लेकिन जब 2025 बिहार विधानसभा चुनाव की आई तो साक्षी मिश्रा कुशवाहा ने उपेंद्र कुशवाहा को इस बात के लिए तैयार किया कि वो अंतिम समय तक बीजेपी के साथ मोलभाव करते रहे। नित्यानंद राय से लेकर धमेंद्र प्रधान तक कुशवाहा को मनाने में लगे रहे लेकिन जब तक दिल्ली में अमित शाह से अंतिम सहमति नहीं मिली तब तक कुशवाहा ये राग अलापने रहे कि एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं है। इस पूरे खेल के पीछे साश्री मिश्रा कुशवाहा की चतुर सोच मानी जा रही थी।
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अंदरखाने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और उपेंद्र कुशवाहा में डील हो गई। लेकिन कुशवाहा किस बात को लेकर राजी हुए ये बात खुलकर सामने नहीं आ पाई। चुनाव प्रचार जब शुरू हुआ तो कुशवाहा की बहू ने अपनी सास स्नेहता के प्रचार की बागड़ोर संभाले रखा और आखिरकार सासाराम सीट उपेंद्र कुशवाहा की झोली में आ गई। सासाराम की सीट पर जीत का बड़ा श्रेय साक्षी मिश्रा कुशवाहा को जाता है। हालांकि मीडिया में चुनाव से पहले साश्री के भी चुनाव लड़ने की चर्चाएं हो रही थी। चुनाव में जीत के बाद जब सरकार बनने के बारी आई और कैबिनेट में एनडीए के हर सहयोगी के शामिल होने का समय आया तो उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश का नाम आगे कर दिया। कुशवाहा के इस फैसले ने सबको चौका दिया क्योंकि दीपक विधानमंडल के सदस्य नहीं थे। कुशवाहा के इस फैसले के बाद उनकी बड़ी राजनीतिक चाल सामने आ गई जो उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले बीजेपी के साथ किया था। कुशवाहा की राजनीति में आये इस बड़े बदलाव के पीछे उनकी बहू साश्री मिश्रा कुशवाहा की सोच बताई जा रही है। जो उपेंद्र कुशवाहा कभी भी बिहार सरकार में मंत्री नहीं बन सके उनके बेटे ने बिना चुनाव जीते ही मंत्री पद पाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।







