डेस्कः पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव में ममता बनर्जी को लगातार एक के बाद एक झटका लग रहा है। शुक्रवार को नंदीग्राम से उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नाम वापस लिया तो शनिवार को रेजीनगर सीट से उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने अपना नाम वापस ले लिया है। जानकारी के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने रेजीनगर से पीछे हटने का फैसला लिया है।शनिवार (19 सितंबर) सुबह पत्रकारों से बात करते हुए रबीउल आलम चौधरी ने कहा कि कम समय में मतदाताओं को नए चुनाव चिह्न से परिचित कराना मुश्किल है।
कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद लिया फैसला
चौधरी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं से चर्चा करने के बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अपने नेता को भी इस बारे में सूचित कर दिया है।उन्होंने ये भी कहा कि कार्यकर्ताओं को प्रचार के लिए नहीं भेजा जा रहा है साथ ही चुनाव चिह्न एक बड़ा मुद्दा है।

दोनों सीटों पर अब ममता के उम्मीदवार नहीं
ममता बनर्जी को लगातार दो दिनों से दो झटके लगे हैं। शुक्रवार को नंदीग्राम से तृणमूल उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। वहीं शनिवार को रेजिनगर उपचुनाव में तृणमूल उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया। राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से पहले ममता की अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बिखरी हुई स्थिति में है। दोनों सीटों पर ममता के पास अब कोई उम्मीदवार नहीं बचा है।
रबीउल आलम चौधरी वापस लेंगे नामांकन
शनिवार सुबह मीडिया से बात करते हुए, रेजीनगर के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने कहा ‘मैंने मुख्य रूप से कार्यकर्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया है। रेजीनगर उपचुनाव के लिए नामांकन वापस लेने का आज आखिरी दिन है।मैं दोपहर 3 बजे तक प्रशासनिक भवन जाकर अपना नामांकन पत्र वापस ले लूंगा’। उन्होंने कहा कि नए चुनाव चिन्ह के साथ जनता तक नहीं पहुंच पाएंगे।
कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान गिरफ्तार
संचिता प्रधान डे ने सूबे के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद नंदीग्राम सीट से अपना नामांकन वापस लेने की घोषणा की थी। वहीं महज 24 घंटों के भीतर ममता बनर्जी के खेमे को एक और बड़ा झटका लगा है। जब संचिता प्रधान ने नंदीग्राम से अपना नामांकन वापस ले लिया, तो ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया, हालांकि इसके तुरंत बाद मिलन प्रधान को 2007 के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। कांग्रेस ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, लेकिन इस घटना को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है।





