RSS के सहयोगी संगठन वनवासी कल्याण आश्रम का दावाः सभी जनजातियां हिंदू, सरना धर्म से जोड़कर हो रही है विभाजन की कोशिश

RSS के सहयोगी संगठन वनवासी कल्याण आश्रम का दावाः सभी जनजातियां हिंदू, सरना धर्म से जोड़कर हो रही है विभाजन की कोशिश

रांची: आएसएस समर्थित वनवासी कल्याण आश्रम जो भारत का सबसे बड़ा आदिवासी संगठन है उसके अखिल भारतीय प्रचाए एवं मीडिया संचार प्रमुख प्रमोद पेठकर ने सरना धर्म कोड की उठ रही मांग को खारिज कर दिया है। उन्होने कहा कि सभी जनजातियां मूल रूप से हिंदू है। वे अतीत में हिंदू थे, वे वर्तमान में हिंदू है और वे भविष्य में भी हिंदू ही रहेंगे। उन्होने कहा कि आदिवासी और हिंदू दोनों ही प्रकृति पूजक है।

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छत्तीसगढ़ के जशपुर में स्थित वनवासी कल्याण आश्रम आरएसएस की अनुषांगिक संगठन है। उसके मीडिया प्रमुख ने जिस तरह ये सरना धर्म को लेकर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि देश में सभी जनजातियां हिंदू है, वा इन्हे सरना धर्म से जोड़कर विभाजन की कोशिश की जा रही है, उससे झारखंड और पड़ोसी राज्यों के विभिन्न समूह की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें सरना धर्म को आदिवासियों का धर्म घोषित करने की मांग हो रही है।

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सरना धर्म कोड की मांग कर रहे संगठनों और लोगों को मानना है कि उनकी प्रथाएं और पूजा पद्धति हिंदुओं और देश के अन्य सभी धर्मो से अलग है। उनकी इस मांग को झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी जेएमएम समर्थन करती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग से सरना कोड की मांग कर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी झारखंड दौरे के दौरान सरना धर्म कोड को लागू करने की मांग करते हुए कहा था कि अगर केंद्र में उनकी सरकार बनेगी तो सरना धर्म कोड को लागू किया जाएगा। संसद में भी लगातार कांग्रेस और जेएमएम के नेता सरना धर्म कोड की मांग करते रहे है। लोहरदगा से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत लोकसभा में लगातार सरना धर्म कोड लागू करने की मांग करते रहे है।

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